गाजीपुर। 50 हजार से ज्यादा लोगों को हर महीने 18 फीसदी रिटर्न का लालच देकर निवेश कराकर करीब 80 करोड़ रुपये की रकम जुटाई गई, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। सदर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि गाजीपुर घाट रेलवे स्टेशन निवासी सिब्बू कुमार सिंह की तहरीर पर ममता अंजलि सर्विस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड समेत अन्य संबंधित संस्थाओं के खिलाफ सदर कोतवाली में सोमवार देर शाम प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर कंपनी के सीएमडी संतोष यादव, निदेशक सुनीता यादव, सीओ ममता सुद और राहुल सूद को प्राथमिकी में नामजद किया है।
सदर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, तहरीर में आरोप लगाया गया है कि जय श्री प्रजापति और श्रवण कुमार बिंद के जरिये कंपनी के अधिकारियों से संपर्क हुआ। इसके बाद हमसफर और तेजाब समेत कई योजनाओं में निवेश के बदले भारी मुनाफा, तीन साल तक मासिक रिटर्न, छात्रवृत्ति और बच्चों को साइकिल देने का लालच दिया गया। 18 प्रतिशत रिटर्न मिलने के झांसे में आकर निवेशकों ने करीब 80 करोड़ रुपये कंपनी में लगा दिए। शुरुआत में एक-दो महीने भुगतान हुआ, लेकिन मई 2026 के बाद रिटर्न मिलना बंद हो गया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, रकम वापस मांगने पहुंचे निवेशकों को गाजीपुर, मुहम्मदाबाद, कासिमाबाद और मुनारी (चौबेपुर, वाराणसी) स्थित कंपनी के कार्यालय बंद मिले। शिकायतकर्ता के अनुसार, आठ सितंबर को आरोपी के पैतृक आवास जौनपुर पहुंचने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद आरोपियों के फोन बंद और धमकी मिलने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं और अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। मामले की जांच निरीक्षक नागेंद्र प्रसाद सिंह को सौंपी गई है।
18 महीने में 18 लाख का लालच
सदर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक शुरुआती जांच में पता चला है कि 1.25 लाख रुपये लगाइए और 18 महीने बाद 18 लाख पाइए... 6.25 लाख लगाइए और 40 लाख मिलने का भरोसा। कहीं हर महीने 23,500 रुपये देने का दावा तो कहीं 10 ग्राम सोना और 36 महीने बाद 10 लाख रुपये का लालच। इन योजनाओं के जरिये ममता अंजलि सर्विस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड ने करीब छह साल में गाजीपुर के कासिमाबाद और मुहम्मदाबाद ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों तक निवेशकों का नेटवर्क खड़ा कर लिया। अब करीब 80 करोड़ रुपये जुटाने के बाद भुगतान बंद करने का आरोप लगा है।
छह साल में बना गांव-गांव नेटवर्क
कंपनी का संचालन 2020 में शुरू हुआ था। कोरोना की दूसरी लहर के बाद लोगों का रुझान तेजी से बढ़ने की बात सामने आई है। कासिमाबाद क्षेत्र में 10 हजार से अधिक लोगों के सदस्य बनने का दावा है। यहां कंपनी से जुड़े 20 से 25 लीडर बताए जा रहे हैं। मुहम्मदाबाद में करीब 100 टॉप लीडर और 40 हजार एजेंट सदस्य होने की बात सामने आई है। इसके अलावा सैदपुर, तहसील में भी लोगों को कंपनी से जोड़ने के अलावा टीम लीडरों के जरिये मऊ और बलिया के लोगों को भी जोड़ा गया। हालांकि इन जिलों में आधिकारिक कार्यालय नहीं था।
पहले छोटी आईडी, फिर लाखों का निवेश
कंपनी से जुड़ने के लिए 3500, 5500 और 12,500 रुपये की शुरुआती आईडी लगाए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद छोटा तेजाब, बड़ा तेजाब, हमसफर और सारथी जैसी योजनाएं बताई जातीं थीं। छोटा तेजाब में 1.25 लाख रुपये पर 18 महीने बाद 18 लाख और बड़ा तेजाब में 6.25 लाख रुपये पर 40 लाख रुपये देने का वादा किए जाने का आरोप है। हमसफर में 1.25 लाख पर 23,500 रुपये प्रतिमाह तथा सारथी में छह महीने पर 10 ग्राम सोना और 36 महीने बाद 10 लाख रुपये देने का दावा किया गया।
केस स्टडी-1
बकरियां बेचकर लगाया पैसा
बारापुर गांव के एक किसान ने पैसा जुटाने के लिए अपनी बकरियां बेच दीं। कटया गांव के एक गरीब किसान ने दुकान खोलने के लिए जुटाई रकम निवेश कर दी। भुगतान रुकने के बाद ऐसे परिवारों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।
केस 2
पत्नी के गहने भी नहीं बचे
शहाबुद्दीनपुर गांव के एक व्यक्ति ने पत्नी के पूरे आभूषण बेचकर कंपनी में निवेश किया। डिहवा और वासुदेवपुर गांव के दो लोगों ने भी परिवार के आभूषण बेचकर तेजाब योजना में रकम लगाई। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि लोगों ने केसीसी, समूह से कर्ज, खेत गिरवी रखकर और ब्याज पर पैसा लेकर भी निवेश किया।
केस स्टडी-3
बेटियों की शादी के लिए जुटाए रुपये फंसे
मोहम्मदाबाद और गाजीपुर की दो महिलाओं ने बेटियों की नवंबर और दिसंबर में होने वाली शादी के लिए हमसफर योजना में पैसा लगाया था। अब भुगतान बंद होने से शादी के खर्च की रकम फंसने की चिंता है।
खाते सीज करने की कार्रवाई
कंपनी के नौ खातों को सीज करने का निर्देश दिया गया है। कासिमाबाद क्षेत्र में करीब 2700 खाते ब्लैकलिस्ट होने की भी चर्चा है। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक नहीं हुई है। पुलिस के अनुसार मामले की जांच निरीक्षक नागेंद्र प्रसाद सिंह कर रहे हैं। निवेशकों की रकम की बरामदगी और आरोपियों की संपत्तियों के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।