मतसा(गाजीपुर)। क्षेत्र के पिपरा, भगीरथपुर में गृहस्थ संत के आवास पर पाक्षिक रामचरित मानस सत्संग का कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। इसमें कथा का रसपान कराते हुए पंडित चंद्रेश महाराज ने कहा कि भगवान की कथा श्रवण मात्र से मनुष्य का कल्याण हो जाता है। कथा को भाव (प्रेम) से और विश्वास से सुना जाए।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव माता सती के साथ हिमालय से उतर कर सुदूर दक्षिण कुंभज ऋषि के पास कथा सुनने गए। कुंभज ऋषि से शंकर जी ने प्रेमपूर्वक कथा श्रवण की लेकिन माता सती ने कथा को अनसुना किया। फलस्वरूप सती जी को पति से वियोग हुआ और अंतत: शरीर तक छूट गया। भगवान की प्रतीक्षा जिसने की उसने उनको प्राप्त किया। अहिल्या, शबरी ने प्रतीक्षा किया तो भगवान चल कर उनके पास गए लेकिन जब सती ने परीक्षा लिया और सूपर्णखा ने समीक्षा किया तो दोनों को दुर्दिन देखना पड़ा। सत्संग में राधेश्याम चौबे, नगदू यादव, बुच्चा यादव एवं संत भिखारीजी ने भी कथा का अमृत पान कराया। कथा मंच का संचालन विनोद श्रीवास्तव ने किया। अंत में नंदू यादव ने आभार व्यक्त किया।