गाजीपुर। जनपद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत चार शिक्षकों की बीएड की डिग्री संदेह के घेरे में होने के कारण उनकी नौकरी जाने का खतरा बढ़ गया है। इन शिक्षकों की बीएड डिग्री की जांच विभाग की ओर से पूरा करा ली गई है। यह डिग्री डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से सत्र 2004-05 में निर्गत पाई गई है। बीएसए ने उक्त चारों शिक्षकों को एक सप्ताह का समय देते हुए अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार ने बताया कि विगत दिनों डा. भीमराव अंबेडकर आगरा विश्वविद्यालय, आगरा से बीएड डिग्री को गलत ढंग से हासिल कर शिक्षक की नौकरी पाने का मामला संज्ञान में आया था। इस पर हाईकोर्ट के आदेश पर शासन स्तर से जांच कराने के निर्देश दिए गए थे। इसीक्रम में जनपद स्तर पर मूल तैनाती प्राप्त चार सहायक अध्यापकों की भी डिग्री पर संदेह जताते हुए जांच टीम गठित कर रिपोर्ट मांगी थी। इसमें प्राथमिक विद्यालय जगवल के सहायक अध्यापक पुष्पेंद्र, उच्च प्राथमिक विद्यालय नरसिंहपुर राजेश कुमार, उच्च प्रावि खानपुर रंजना एवं प्रावि आजमगढ़ (मूल तैनाती जौनपुर जनपद) के नाम शामिल रहे। जिनकी बीएड की डिग्री सत्यापन के लिए जांच टीम को आगरा विवि भेजा गया था। जांच में इनके प्रमाणपत्रों पर संदेह जताया गया है। जिनको नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। सूत्रों से यह ज्ञात हुआ है कि जिले में जांच के बाद सिर्फ चार ही शिक्षक आगरा से उस सत्र में डिग्री लिए मिले। मालूम हो कि इस सत्र की बीएड डिग्री को फर्जी घोषित किया जा चुका है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद शासन ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षाधिकारियों को जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।