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राम-राम कहते शरीर को त्याग देते हैं राजा दशरथ

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गाजीपुर। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वावधान में लीला के आठवे दिन शनिवार को सकलेनाबाद स्थित मनबोध लाल मुख्तार के निकट भारद्वाज मुनि के आश्रम पर श्री भरत आगमन, विदाई लीला का मंचन किया गया।
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अयोध्या नरेश महाराज दशरथ श्रीराम को वन जाते एवं अयोध्या वासियों द्वारा जयकारा सुनकर महारानी कैकेयी के कक्ष से दौड़ते हुए पहुंचते हैं और राम-राम कहते जमीन पर गिरते अपना शरीर त्याग देते हैं। सूचना पाकर कुल गुरु वशिष्ठ राजदरबार में आते हैं और मंत्री सुमंत से कहते हैं कि भरत के आगमन तक राज्य का कार्यभार आप देखते रहिए। राजदूत श्रीधर रथ द्वारा कैकेयी देश के लिए पहुंचते हैं। भरत अयोध्या से श्रीधर से महाराज का हालचाल पूछते हैं। श्रीधर गुरु वशिष्ठ द्वारा दिए गए संदेश को सुनाते हुए कहते हैं कि आप दोनों भाइयों को गुरुदेव ने अतिशीघ्र बुलाया है। इतना सुनने के बाद दोनों भाई अपने नाना और मामा को प्रणाम करते हुए रथ पर सवार होकर अयोध्या में महारानी कैकेयी के दरवाजे पहुंचते हैं। माताओं को विधवा रूप में देखकर अचंभित हो जाते हैं।

महाराज दशरथ और राम के बारे में माता कैकेयी से पूछते हैं। महारानी कहती हैं कि महाराज स्वर्ग सिधार गए और राम, सीता, लक्ष्मण वन के लिए चले गए। इतना सुनते ही भरत मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़ते हैं। कार्यक्रम सफल बनाने में अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, उपाध्यक्ष प्रकाशचंद्र श्रीवास्तव, विनय कुमार सिंह, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी, संयुक्त मंत्री लक्ष्मीनारायण, उपमंत्री लव कुमार त्रिवेदी, मेला व्यवस्थापक (कार्यकारी) विरेश राम वर्मा, उपमेला व्यवस्थापक शिवपूजन तिवारी, कोषाध्यक्ष अभय कुमार अग्रवाल, आय-व्यय निरीक्षक अनुज अग्रवाल, कार्यकारिणी सदस्य रामनारायण पांडेय, राजेष प्रसाद, प्रदीप कुमार, ओमनाराणय सैनी, अशोक कुमार अग्रवाल, योगेश कुमार वर्मा, ऋषि चतुर्वेदी, राजेंद्र विक्रम सिंह, अजय पाठक, सुधीर कुमार अग्रवाल, अजय कुमार अग्रवाल आदि का सहयोग रहा।
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औड़िहार संवाददाता के अनुसार रामलीला मैदान में रविवार को रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित चित्रकूट के कलाकारों की ओर से सीता हरण की लीला में सीता हरण के बाद राम की व्याकुलता और सीता के लिए किए गए विलाप ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। लक्ष्मण को राम की सहायता के लिए भेजने का सीता द्वारा किया गया हठ भी दर्शकों को गंभीर चिंतन मे डालता रहा। कहलाकारों के अभिनय ने उपस्थित लोगों को तालियां बजाने के लिए विवश किया।
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