फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दस साल बाद भाई की हत्या के मामले में कोर्ट से मिला न्याय

विज्ञापन
विज्ञापन
गाजीपुर। करंडा थाने के माहेपुर गांव में एक दशक पहले भाई की हत्या के मामले में बहन को कोर्ट से न्याय मिला। शनिवार को इस प्रकरण में जिला एवं सत्र न्यायाधीश जीके पांडेय की अदालत में फैसला सुनाया गया। जिसमें अपराधिक मानव वध के मामले में दोषी पाते हुए तीन अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं में दस-दस साल का सश्रम कारावास और कुल 25-25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
विज्ञापन

अभियोजन पक्ष के मुताबिक शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के पीरनगर की रहने वाली कुसुम यादव पुत्री सीताराम यादव करंडा थाना क्षेत्र के माहेपुर गांव में सफाई कर्मी के पद पर तैनात थी। रोज वह टेंपो अथवा भाई के साथ बाइक से माहेपुर जाती थी। इस बीच कुसुम ने पांच मई 2010 को करंडा थाने में तहरीर दी कि उसके साथ माहेपुर गांव के सुरेंद्र सिंह पुत्र अवधेश सिंह और श्रवण यादव पुत्र बलिख यादव द्वारा आए दिन छेड़खानी तथा अश्लील हरकतें की जा रही हैं। पांच मई 2010 को उसका सगा भाई राकेश उसे माहेपुर ग्राम सभा में सुबह छोड़ने गया। तब महेपुर निवासी सुरेंद्र सिंह पुत्र अवधेश सिंह, श्रवण यादव पुत्र बलि यादव तथा कोतवाली थाने के पीरनगर निवासी कुंदन पुत्र रामजी चौहान तथा चार अन्य लोग माहेपुर गांव में ही लाठी-डंडे और तमंचा लहराते हुए मारने-पीटने लगे। पिटाई से बेदम हो कुसुम का भाई राकेश बेहोश हो गया था। इसके बाद आरोपियों ने कुसुम के साथ अश्लील हरकत की। कुसुम के शोर मचाने पर गांव के लोग वहां पहुंच गए। ग्रामीणों की मदद से वह अपने भाई को जिला अस्पताल में दाखिल कराई। हालत नाजुक होने पर घायल राकेश को वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान सिर में लगे गंभीर चोट के कारण बीएचयू में उसकी मौत हो गई। तहरीर के आधार पर पुलिस ने सुरेंद्र, श्रवण, कुंदन तथा चार अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। राकेश की मौत के बाद इसमें धारा 304 बढ़ोतरी की गई। इसके बाद मनोज यादव पुत्र जयप्रकाश यादव, सर्वेश यादव पुत्र बलि यादव, बृजमणि उर्फ वीर मणि पुत्र अंबिका सिंह का नाम प्रकाश में आया। सभी नाम जोड़ते हुए छह लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से नौ गवाह पेश किए गए। अभियोजन पक्ष की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता कुमार मलिका बेगम एवं वादी के अभिवक्ता राम प्रकाश सिंह तथा बचाव पक्ष से अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने मनोज यादव, सर्वेश यादव तथा कुंदन को साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त कर दिया। जबकि सुरेंद्र सिंह, श्रवण यादव और बृजमणि उर्फ वीर मणि को उपरोक्त धाराओं में दोषी पाते हुए दस-दस साल सश्रम कारावास और कुल 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। भाई की हत्या के बाद महिला अकेली न्याय के लिए संघर्ष कर रही थी। शनिवार को कोर्ट से न्याय मिलने के बाद उसकी आंखों से खुशी के आंसू नहीं रुक रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें