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संपूर्ण ब्राह्मांड के कण-कण में व्याप्त हैं शिव

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गहमर। एकमात्र देवाधिदेव भगवान शिव ही इस जगत के गुरु हैं। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म, जाति अथवा संप्रदाय या वर्ण का हो वह शिव को अपना गुरु बना सकता है। शिव उस शक्ति का नाम है जो संपूर्ण ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त है। यह सारी सृष्टि शिव तत्व से ही संचालित हो रही है। प्राणी के सारे कष्ट महेश्वर शिव के श्री चरणों में समाप्त हो जाते हैं। विश्व का कल्याण शिव में ही निहित है।
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यह बातें शनिवार को थाना क्षेत्र के करहिया गांव में आयोजित शिव गुरु आध्यात्मिक परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कही। आरंभ में मंगल सिह ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए शिव गुरु महोत्सव के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। शिवलिंग, ज्योतिर्लिंग और पार्थिव लिंग क्या है, शिव ही गुरु क्यों, अन्य देवी-देवता क्यों नहीं तथा आत्मा, मन और शरीर क्या है एवं यह कैसे संचालित होता है आदि आध्यात्म के गूढ़ तत्वों को इस क्रम में वक्ताओं ने उजागर किया। इस आध्यात्मिक महोत्सव में बिहार के उमेश, सत्यनारायण शर्मा, छोटक सिंह, दिलीप मिश्रा, सुरेंद्र यादव, कुसुम देवी, रीता देवी, राजेंद्र प्रसाद, रविंद्र ठाकुर, महेंद्र प्रसाद, महेश प्रसाद शर्मा, रिंकू देवी, कमलेश सिंह, पप्पू सिंह, शंकर प्रसाद एवंम कृष्णा राम ने विचार व्यक्त किए।
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