शहर सहित जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विजय दशमी मंगलवार को धूमधाम से मनी। शहर के लंका मैदान में असत्य के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया गया। पुतला दहन होते ही जय श्रीराम का जयकारा लगा। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में भी रावण के पुतले का दहन किया गया। कई जगहों पर मेला भी आयोजित हुआ। सभी स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
लंका मैदान में 60 फीट का विशालकाय दशानन का पुतला लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। निर्धारित समय पर गाजे-बाजे के साथ भगवान राम लक्ष्मण के साथ रावण के पुतले के पास पहुंचे। शाम सात बजे राम और रावण का युद्ध प्रारंभ हुआ। काफी देर तक चले युद्ध के बाद भगवान राम ने रावण का वध कर दिया। वध होते ही आतिशबाजी शुरू हो गई। इसके बाद भगवान राम के साथ जिलाधिकारी आर्यका अखौरी एवं एसपी ओमवीर सिंह ने आठ बजे रावण के पुतले को आग के हवाले किया। आग लगते ही श्रद्धालु भगवान श्रीराम का जयघोष करने लगे। पूरा माहौल राममय हो गया। पुतला दहन के बाद लोग अपने घरों को रवाना हुए। इस दौरान एडीएम एके सिंह, एएसपी नगर ज्ञानेंद्र, सीओ गौरव कुमार, सदर एसडीएम तथा अन्य अधिकारियों के साथ कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा, लव कुमार त्रिवेदी, वीरेश राम वर्मा उपस्थित थे।मुहम्मदाबाद: महादेवा स्थित शिव मंदिर के मैदान में लक्ष्मण, मेघनाथ एवं राम रावण युद्ध हुआ। रावण वध के बाद राम चबूतरा के पास बने रावण के पुतले में आग लगते ही जमकर आतिशबाजी हुई। इस मौके पर एएसपी ग्रामीण बलवंत, एसडीएम आशुतोष कुमार, सीओ हितेंद्र कृष्ण आदि उपस्थित थे। स्वागत रवि प्रकाश पाण्डेय और ओमप्रकाश गिरी ने आभार जताया। बारा : रामलीला मैदान में श्रीराम और रावण का युद्ध देखने सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे थे। रावण दहन के बाद प्रभु श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की झांकी निकाली गई।
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भगवान राम ने उतारी मां दुर्गा की आरती
गाजीपुर। शाम छह बजे के बाद लंका मैदान में दुर्गा प्रतिमाओं के जुलूस पहुंचने का क्रम शुरु हो गया था। ट्रक, ट्रैक्टर पर रखी मूर्तियां लंका मैदान में उस स्थान पर पहुंची जहां भगवान राम, लक्ष्मण सिंहासन पर बैठे हुए थे। मूर्तियों के पहुंचने के बाद भगवान राम ने मां दुर्गा का पूजन-अर्चन करने के बाद उनकी आरती की। इसके बाद प्रतिमा विसर्जन के लिए रवाना हुई। जो मूर्तियां देर से निकली थी, वह लंका मैदान न जाकर सीधे विसर्जन के लिए रवाना हुई।
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मेले में चटपटे व्यंजनों का चखा स्वाद
गाजीपुर। दशहरा के मौके पर लंका मैदान में लगे मेले में दर्जनों की संख्या में दुकानें लगाई गई थी। चाट, पानी पूरी, चाउमीन, बर्गर, क्रीमरोल, केक, भेलपुरी, पकौड़ी के साथ ही सौंदर्य प्रसाधन के सामानों संग खिलौने की दुकानें भी लगी थी। एक तरफ जहां महिलाओं ने चटपटे व्यंजनों का आनंद उठाया और सौंदर्य प्रसाधन के सामानों की खरीदारी की, वहीं खिलौनों की दुकानों पर नन्हे-मुन्नों की भीड़ लगी रही। अपने मन-पसंद खिलौने खरीदने के लिए बच्चे अभिभावकों से जिद करते रहे। महंगाई की परवाह किए बगैर अभिभावकों ने बच्चों की मांग को पूरा किया।
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मेला समाप्त होने के बाद भी आवागमन में बना रहा अवरोध
गाजीपुर। मेले को लेकर लोगों में इस कदर उत्साह था कि शाम चार बजे से सड़कों पर लोगों का हुजूम दिखाई देने लगा था। शहर की कोई ऐसी सड़क और गली नहीं बची थी, जिस पर लोगों की भीड़ नहीं दिखाई दे रही थी। भीड़ के कारण बड़े वाहनों को दूसरे मार्गों से गुजारा गया। भीड़ का अंदाजा इस तरह से लगाया जा सकता था कि मेला खत्म होने के काफी देर बाद भी भीड़ की स्थिति बनी रही। लंका मैदान से लंका बस स्टैंड तक की दूरी तक आने में लोगों को काफी समय लग गया। भीड़ के दबाव के कारण लोग वाहनों की तलाश करते रहे। अधिकांश लोगों को साधन न मिलने के कारण पैदल ही घर के लिए रवाना होना पड़ा।