गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के आपातकक्ष (इमरजेंसी) के छह बेड आईसीयू वार्ड शुरू हो गया है। यह जीवन रक्षक उपकरणों से लैस है। आपातकक्ष में रोज 500 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। दो से तीन घंटे राहत के बाद करीब 200 मरीज उपचार कराकर घर चले जाते हैं। गंभीर हालत वाले मरीजों को आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है। शहर एवं ग्रामीण इलाकों के अलावा गैर जनपद और सटे प्रांत से भी मरीज उपचार कराने मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। यहीं नहीं 24 घंटे संचालित होने वाले आपातकक्ष में भी प्रतिदिन विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीजों का उपचार होता है। यहां आने वाले मरीजों का पहले चिकित्सक द्वारा उपचार किया जाता है। इसके बाद काॅलेज प्रशासन द्वारा बनाये गए रेड और यलो जोन में स्थिति के अनुसार भर्ती कराया जाता है। यलो जोन में भर्ती मरीज को आराम होने पर छोड़ दिया जाता है। जबकि रेड जोन में भर्ती मरीजों की स्थिति में सुधार न होने पर आईसीयू में भर्ती करके उनका उपचार किया जाता है। आईसीयू वार्ड में लगे सभी बेड जहां अत्याधुनिक हैं, वहीं रक्तचाप, हृदयगति और श्वास संबंधित जानकारी के लिए प्रत्येक बेड पर माॅनिटर लगा हुआ है। यहीं नहीं पाइप लाइन से प्रत्येक बेड के पास जंक्शन बनाकर ऑक्सीजन की भी व्यवस्था दी गई है, जिससे मरीजों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा प्रदान की जा सके।
छह बेड के आईसीयू वार्ड का संचालन शुरू हो गया है। इसमें भर्ती मरीजों की निगरानी के लिए डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है, ताकि उपचार के दौरान कोई समस्या न आए। - प्रोफेसर आनंद मिश्रा, प्राचार्य, महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज गाजीपुर
इमरजेंसी में 11, रेड में आठ तो यलो में पांच बेड -मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को भर्ती कर उपचार करने के लिए 11 बेड लगाए गए हैं। वहीं रेड जाने में आठ तो यलो में पांच बेड है। इसके अलावा आईसीयू वार्ड के 24 घंटे संचालन और मरीजों की निगरानी के लिए डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई है। यहीं नहीं पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे तक की सुविधा आईसीयू में उपलब्ध कराई गई है।