कासिमाबाद(गाजीपुर)। पीसीएफ की तरफ से गेहूं का उठान न होने से खरीद प्रभावित हो रही है। किसानों का आरोप है कि क्रय केंद्रों से बोरे न मिलने के कारण उन्हें मजदूरी के रूप में दोगुना खर्च करना पड़ रहा है। किसानों ने जिला प्रशासन से खरीद से पहले उन्हें बोरा उपलब्ध कराने की मांग की है।
राज्य सरकार के निर्देश पर इस समय पूरे प्रदेश में सरकारी गेहूं खरीद केंद्र के माध्यम से किसानों का गेहूं खरीदा जा रहा है। खरीद के लिए सरकार ने प्रति कुंतल 1735 रुपये समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। इसके अलावा, 10 रुपये अलग से बोरे को उतारने और चढ़ाने का खर्च किसान को दिया जा रहा है। इस समय कासिमाबाद विकासखंड में गंगौली, खजुहां, पाली, कासिमाबाद के अलावा दो केंद्र और संचालित हैं। इन केंद्रों की हालत यह है कि किसानों का खरीदा गया गेहूं बाहर पड़ा हुआ है। गोदाम फुल है। इसे पीसीएफ की ओर से उठाने का काम किया जा रहा है लेकिन समय से नहीं उठाने के कारण खरीद प्रभावित हो रही है। अकेले गंगौली केंद्र पर 15 सौ कुंतल गेहूं की खरीद हो चुकी है और सभी बोरे बाहर खुले आसमान में पड़े हैं। अगर मौसम खराब हुआ तो सभी गेहूं भीगकर खराब हो सकता है। दूसरी तरफ, किसानों का कहना है कि जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार किसानों को बोरा उपलब्ध करा देती तो किसान आसानी से गेहूं बोरे में भरकर केंद्र तक पहुंचा देते। ऐसा न होने से किसानों को दो तरफा मजदूरी देनी पड़ रही है जिससे उनको काफी नुकसान हो रहा है। गंगौली केंद्र के प्रभारी उदय नारायण उपाध्याय ने बताया कि पीसीएफ से आज गेहूं उठाने की व्यवस्था हो रही है। अगर गेहूं चला गया तो खरीद और तेज हो जाएगी। सहायक विकास अधिकारी सहकारिता भूपेंद्र सिंह ने बताया कि किसानों को गेहूं केंद्र पर ले आने के लिए बोरा देने का प्रावधान नहीं है। किसान अपने बोरे में गेहूं केंद्र तक ले आएंगे, जिसे पलट कर केंद्र पर नए बोरे में भरा जाता है। इसीलिए उन्हें 10 रुपये अतिरिक्त दिया जा रहा है।