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सामने आया शादी अनुदान में लाखों रुपए के फजीवाड़ा का मामला

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गाजीपुर। गरीब परिवार की बेटियों की शादी के लिए मिलने वाले शादी अनुदान में हजारों रुपये के गोलमाल का मामला प्रकाश में आया है। दिलदारनगर नगर पंचायत में ही कई लोगों ने फर्जी तरीके से शादी अनुदान का लाभ लिया है। इस प्रकरण में वर्ष 2015 में पांच लाभार्थी सहित कुल आठ लोगों के विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज किया गया था। शादी अनुदान में कई अधिकारी, कर्मचारी तथा प्रभावशाली व्यक्तियों की गर्दन फंसने के कारण पूरी तरह से जांच सही नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने इसका आरोप लगाते हुए पुन: मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी के बाला जी को पत्रक सौंपा है। डीएम ने जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी तथा तहसीलदार को जांच करने का आदेश दिया है। इस प्रकरण की जांचकर तहसीलदार ने प्रथमदृष्टया शिकायत को सही ठहराया है।
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वर्ष 2013-14 में शादी अनुदान में दिए गए धन का जमकर दुरुपयोग किया गया है। पूरे जनपद में लाखों रुपये का गोलमाल विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से किया गया था। शादी अनुदान का धन फर्जी तरीके से लेने की शिकायत दिलदारनगर निवासी लाल बहादुर कुशवाहा ने वर्ष 2013 में तत्कालीन जिलाधिकारी चंद्रपाल सिंह से की थी। जिसमें कुल 40 लोगों के खिलाफ जांच करने को कहा गया था। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच बैठाई थी और जांच रिपोर्ट आने के बाद शादी अनुदान का गलत तरीके से लाभ लेने वाले पांच लाभार्थी, दो लेखपाल और एक नाजिर पर जिला पिछ़ड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी द्वारा 24 मार्च 2015 को दिलदारनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराया गया। लेकिन शिकायतकर्ता जांच से संतुष्ट नहीं था। शिकायतकर्ता ने इस प्रकरण में दोबारा जांच के लिए उच्चाधिकारियों से शिकायत की। इसके बाद पुन: इस प्रकरण में जांच के आदेश दिए गए हैं। शिकायतकर्ता की माने तो जमानिया तहसील अंतर्गत दिलदारनगर बाजार के 19 लाभार्थियों में से अधिकांश व्यक्ति अपने अंकित पते पर नहीं रहते हैं। इससे स्पष्ट है कि इन व्यक्तियों के नाम से गलत तरीके से धनराशि स्वीकृत हुई है।
दिलदारनगर निवासी लालबहादुर सिंह की ओर से जनता दर्शन में भी 19 लाभार्थियों के शादी अनुदान की जांच के लिए एक सप्ताह पूर्व प्रार्थना पत्र दिया है। इसके बाद जिलाधिकारी ने जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी को जांच करने का निर्देश दिया है। इस आधार पर तहसीलदार जमानिया से सूची में अंकित शादी अनुदान के प्रार्थना पत्रों की जांच कराई गई, जांच आख्या के अनुसार क्रमांक संख्या चार से 17 एवं 19 पर दर्ज व्यक्ति अंकित पते पर नहीं रहते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि उक्त व्यक्तियों के नाम से गलत तरीके से धनराशि स्वीकृत हुई है। उपजिलाधिकारी की ओर से तहसीलदार से कराई गई जांच में कहा गया है कि प्रकरण प्रथमदृष्टया धोखाधड़ी का प्रतीत होता है। दिलदारनगर एवं उसिया गांव के इन 19 लाभार्थियों की जांच कराने के जिलाधिकारी के फरमान से संबंधित लाभार्थियों की नींद उड़ी हुई है। जिला विकलांग/जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी नरेंद्र विश्वकर्मा ने कहा कि प्रकरण काफी पुराना है। शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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