गाजीपुर। यूपी-बिहार सीमा पर ही नहीं घनी आबादी में भी शराब की भट्ठियां संचालित हो रहीं है। इतना ही नहीं कई जगह अवैध रूप से दारू बेचने का भी धंधा फल-फूल रहा है। यही कारण ही कुछ साल में कुछ लोगों की अत्यधिक शराब पीने से भी मौत हो चुकी है। जहरीली शराब पीने से चार साल पहले कई लोगों की असमय मौत हो गई थी। शराब ने जिंदगी छीनने के साथ उनके परिजनों को भी सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया। मृतकों के घर की आर्थिक स्थिति आज भी काफी दयनीय बनी हुई है। आज भी उनके परिजन इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं। अपने को खोने का दर्द लिए मेहनत मजदूरी कर मृतक के परिवार और अपना पेट पालने का काम कर रहे हैं।
वर्ष 2013 के मार्च माह में जहां होली की हुड़दंग में सभी व्यस्त थे, वहीं रेवतीपुर थाना क्षेत्र के त्रिलोकपुर गांव में जहरीली शराब के सेवन से रामप्यारे राम, बृजेश सिंह, राम सिंह, जितेंद्र कुशवाहा, उमाशंकर पासवान, नरेंद्र कुशवाहा काल का ग्रास बन चुके थे। उसी दिन जहरीली शराब के सेवन से डेढ़गांवा निवासी सोनू खरवार, उतरौली के श्रीराम शर्मा और नगसर थाना क्षेत्र के अवती निवासी सोनू राम और अजय राम की मौत हो गई थी। यही नहीं इस जहरीली शराब के सवेन से विजय शंकर सिंह और संजय सिंह की जान तो बच गई, लेकिन दोनों की आंखें चली गई। चार साल बाद भी जहरीली शराब के सेवन से मरने वाले मृतकों के परिजनों में दर्द साफ झलक रहा है। मृतकों के घरों की आर्थिक स्थिति भी काफी दयनीय हो चुकी है। जहरीली शराब के सेवन से मरने वाले त्रिलोकपुर निवासी नरेंद्र कुशवाहा के पिता राम विलास कुशवाहा ने बताया कि मजदूरी कर किसी तरह से परिवार का पालन पोषण चल रहा है। आर्थिक स्थिति काफी खराब होने के चलते दो जून की रोटी के लिए दिन रात मजदूरी करनी पड़ रही है। अपने पुत्र को याद कर पिता के आंखें भी छलक गई। इसके बावजूद भी ग्रामीण इलाकों में शराब की भट्टियां चल रही है। पुलिस प्रशासन की ओर से कोई सार्थक कदम नहीं उठाया जा रहा है। इस संबंध में प्रभारी आबकारी अधिकारी अजीत सिंह यादव ने बताया कि टीम द्वारा बराबर छापेमारी की जाती है। जनपद में काफी हद तक इस अंकुश लगाने का प्रयास किया गया है।