नगर के 25 वार्डों के घरों से निकलने वाले लगभग 60 मीट्रिक टन कूड़े और शहर की साफ-सफाई पर नगर पालिका की ओर से प्रतिमाह करीब 50 लाख से अधिक रुपये खर्च होते हैं। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। जगह-जगह कूड़े के ढेर, जलभराव के बीच खुली नालियां और उसमें पनपने वाले मच्छरों का आतंक है।
हालांकि नगर पालिका की ओर से इससे बचाव के लिए नगर पालिका प्रशासन वार्डवार फॉगिंग व छिड़काव का दावा करती है, जिस पर प्रतिमाह करीब 90 हजार रुपये खर्च करने की बात नपा के जिम्मेदारों की ओर से कही जाती है, लेकिन धरातल पर फाॅगिंग करने वाली कोई टीम ही नहीं दिखाई दे रही है।
नपा पालिका से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक शहर की सफाई व्यवस्था के लिए करीब 390 सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें 80 स्थाई 60 संविदाकर्मी और करीब 250 आउटसोर्सिंग के कर्मी तैनात हैं। इसके अलावा कूड़ा उठान के लिए 17 टेंपो, 12 ट्रैक्टर, 8 मैजिक, एक डंपर, दो हाइवा और दो कांपेक्टर चलते है।
फिर भी शहर के महुआबाग, मिश्र बाजार, चीतनाथ, लाल दरवाजा, गोजीतर, सकलेनाबाद, गोराबाजार, लंका, महिला कॉलेज रोड, झून्नू लाल चौराहा, नवाबंगज, निरुद्दीनपुरा बाजार के अलावा, शास्त्री नगर, आमघाट, अष्टभुजी कालोनी, लकड़ी का टाल, तुलसी का पुर, उर्दू बाजार, कोट किला कोहना, प्रकाश टॉकिज आदि मोहल्ले के कई स्थान कूड़े से पटे हैं।
मच्छरों से हो रही परेशानी : शहर में फॉगिंग और एंटी लार्वा के छिड़काव के नाम पर नगर पालिका प्रशासन द्वारा प्रति महीने में करीब 90 हजार रुपये फॉगिंग एवं एंटी लार्वा के छिड़काव के नाम पर खर्च किए जा रहे है। इसके बाद भी नगर में मच्छर लोगों का खून चूस रहे हैं।
इतना ही नहीं शहर में संक्रामक बीमारियां फैलने के कारण लोग परेशान है। शिकायत के बाद भी नगर पालिका प्रशासन सिर्फ कागजी आंकड़ेबाजी में जुटा है। जबकि जिले में डेंगू के मरीजों के मिलने का क्रम जारी है।