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नहाय-खाय के साथ आज से शुरू होगा छठ का व्रत

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गाजीपुर। लोक आस्था का महापर्व छठ नहाए-खाए के साथ मंगलवार से शुरू होगा। इस पर्व की तैयारी को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। पति और पुत्र की दीर्घायु के लिए रखे जाने वाले डाला छठ के व्रत की तैयारी पूरी कर ली गई है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के पहले दिन व्रती महिलाएं नहाय-खाय करती है। बुधवार को पूरे दिन निर्जला व्रत रहकर खरना करेंगी तथा इसके अगले दिन शाम को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। जबकि शुक्रवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रत संपन्न हो जाएगा।
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ऐसी मान्यता है कि छठ व्रत की पूजा से आरोग्य और वैभव की प्राप्ति होती है। परिवार की खुशहाली और संतान प्राप्ति के लिए पति-पत्नी दोनों छठ मइया का व्रत रखते हैं। 24 अक्तूबर से शुरू होने वाले चार दिवसीय पर्व को लेकर जिले में जोर-शोर से तैयारी शुरू हो चुकी है। व्रती महिलाओं के घरों के लोग गंगा घाटों को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। पोखरों और तालाबों के किनारे भी इसकी तैयारी की जा रही है। वेदी बनाने का काम जोर-शोर के साथ किया जा रहा है। मंगलवार को डाला छठ के महापर्व का श्री गणेश नहाय-खाय के साथ होगा। व्रती पारंपरिक वेशभूषा पहनेंगे और परिजन काम-काज में उनका सहयोग करेंगे। पर्व के चार दिनों तक घरों में छठ मइया का गीत गूंजेगा। नहाय-खाए के दिन व्रती महिलाएं लौकी की सब्जी, अरवा चावल और चने की दाल खाएंगी। इस भोजन को घर पर मिट्टी के चूल्हे पर तैयार करने की परंपरा है। जबकि दूसरे दिन बुुधवार को दिन भर निर्जला व्रत रख खरना करेंगी। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर रोटी और खीर का सेवन कर खरना किया जाएगा। 26 अक्तूबर को व्रती महिलाएं निर्जला व्रत जारी रखेंगी। फल-फूल, कंद-मूल और ठेकुआ को सूप-डलिया में सजाकर व्रती गंगा, नदी-तालाब के जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्य देंगी। 27 अक्तूबर- नए सिरे से डलिया को फल-फूल से सजाकर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर प्रसाद वितरण कर व्रत का समापन किया जाएगा।
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