मौधा। गाजियाबाद के श्मशान घाट में छत गिरने के बाद भी जर्जर हो चुके भवनों को गिरवाने के प्रति स्थानीय प्रशासन उदासीन रवैया अपनाए हुए है। सैदपुर मुख्यालय पर ही कई सरकारी भवन जर्जर हालत में हैं। जो किसी भी समय गिर सकते हैं, लेकिन उनमें कार्यालय संचालित हो रहे हैं। सैदपुर ब्लाक परिसर में करीब 60 वर्ष पहले बना पशु चिकित्सा विभाग का कार्यालय ऐसे ही जर्जर भवनों में से एक है।
भवन निर्माण के कई साल बाद भी मरम्मत न होने से इसकी हालत इतनी खराब हो गई है कि यह कब गिर जाएगा कुछ नहीं कहा जा सकता। इसके बावजूद कर्मचारी यहां काम करते हैं। आंधी और बारिश के दौरान कार्यदिवस में कर्मचारी भवन के बाहर ही रहते हैं। साठ वर्ष पहले बना यह भवन जर्जर हो गया है। दीवारों के प्लास्टर उखड़ चुके हैं। इनमें दरारें पड़ गई हैं। छत का स्लैब जगह-जगह से टूटकर गिर चुका है। फर्श चटक गई है। अधिकांश दरवाजे भी टूट चुके हैं। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है। इसके अलावा सैदपुर नगर में तमाम ऐसे सरकारी जर्जर भवन हैं, जिनके पास से गुजरने में लोगों को भय लगता है। इनमें से नगर के पुराने डाकघर भवन की हालत भी खराब है। यह कभी भी गिर सकता है। इसके अलावा खाद-बीज का सरकारी भवन अत्यंत जर्जर हालत में हैं। 70 एवं 80 के दशक में बने सैदपुर के लगभग तीन दर्जन भवन जर्जर होकर हादसों को दावत दे रहे हैं। इन जर्जर भवनों को गिरवाने के प्रति नगर पंचायत प्रशासन उदासीन रवैया अपनाए हुए है।
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सैदपुर नगर क्षेत्र में पचास वर्ष पुराने भवनों की संख्या 40 है। इनकी सूची वर्ष 2018 में ही जिला प्रशासन को सौंप दी गई है, लेकिन इनके निस्तारण से संबंधित कोई निर्देश अब तक नहीं मिला है। - संतोष कुमार मिश्र, अधिशासी अधिकारी, सैदपुर नगर पंचायत।