शहर के ददरीघाट पर गंगा में मिलता नाली का पानी। संवाद
गाजीपुर। मोक्षदायिनी गंगा प्रदूषण से कराह रही है। हालत यह है कि स्नान तो दूर आचमन के लायक भी जल नहीं है। जिले में 35 नालों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे गंगा में गिर रहा है। इनमें शहर के 18 नाले भी शामिल है, जिनसे प्रतिदिन लगभग 37.15 एमएलडी सीवेज गंगा को प्रदूषित कर रहा है। शासन के आदेश के बाद भी नालों का पानी रोकने के लिए कोई समुचित प्रबंध नहीं किए गए। मकर संक्रांति को प्रदूषित पानी में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे।
एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) की गाइड लाइन में साफ है कि नदियों में बिना शुद्धिकरण के नालों का पानी नहीं छोड़ा जाना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे दूर है। जल निगम के अधिकारियों के अनुसार जिले से होकर गुजरने वाली गंगा में 35 नालों से गंदा पानी गिर रहा।
इनमें 18 नाले गाजीपुर शहर में हैं। ददरीघाट, चीतनाथ, कलेक्टर घाट, मंसूर घाट, स्टीमर घाट, रामघाट, अंजनी घाट, पोस्ता घाट, सिकंदरपुर, बड़ा और छोटा महादेवा जैसे प्रमुख स्नान घाटों से गंदा पानी नालों के जरिये गंगा में जा रहा है। नालों के पानी के ट्रीटमेंट की कोई व्यवस्था अभी तक नहीं की जा सकी है।