कासिमाबाद(गाजीपुर)। जिला प्रशासन की जांच में मृतक पेंशनधारी जिंदा पाए गए और सबकी पेंशन शुरू कर दी गई। पेंशन बंद करने में ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी की संलिप्तता पाई गई है। पूरे विकास खंड में 1100 वृद्धों की पेंशन बंद की गई थी। जिसमें ग्राम पंचायत बासुदेवपुर में भी बारह से अधिक पेंशनधारियों को मृत दिखाकर पेंशन बंद कर दिया गया था। ‘अमर उजाला’ अखबार में बीते 18 अक्टूबर को ‘गाजीपुर में मृत दिखा रोक दी 1100 लोगों की वृद्धा पेंशन’ शीर्षक से प्रथम पेज पर खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन ने मृत पेंशनधारियों की जांच कराया, जिसमें सभी जिंदा पाए गए। अब पेंशनधारियों के खाते में पेंशन भेजना शुरू कर दिया गया है।
अखबार में खबर छपते ही जिला प्रशासन में खलबली मच गई थी। कुछ दिन बाद ही इसका असर दिखाई देने लगा और आनन-फानन में जांच शुरू हो गई। सभी मरे लोगों को पुन: जिंदा दिखा दिया गया। जिनको जिंदा रहते मृत दिखाकर पेंशन बंद किया गया था। अब उनके खातों में पेंशन भेज दी गई है। पेंशन मिलने के बाद पेंशनधारी अखबर को धन्यवाद ज्ञापित करते नहीं थक रहे हैं। पेंशनधारियों ने कहा कि निश्चित रूप से हम लोगों की लाठी का सहारा अमर उजाला बना। जिससे हमारे बुढ़ापे की पेंशन पुन: शुरू हो गई। लोगों को काफी दिन बाद न्याय मिला है। मालूम हो कि ग्राम पंचायत बासुदेवपुर में कुल 52 वृद्ध लोगों को वृद्धों को वृद्धापेंशन का लाभ मिलता था। इन 52 में एक दर्जन लोगों का पेंशन इसलिए बंद कर दिया गया था कि उन्हें जांच में मृतक दिखाया गया था। जब पेंशन लेने के लिए ये लोग अपने बैंक गए तो पता चला कि पेंशन खाते में नहीं आई है। फिर ये लोग जब ब्लॉक मुख्यालय गए तो वहां पता चला कि इन लोगों को मृतक होने के कारण पेंशन बंद कर दिया गया है। फिर ये लोग सभी सबूतों के साथ जिलाधिकारी और अन्य बड़े अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाया। लेकिन सफलता नहीं मिली । इसके बाद इस खबर को ‘अमर उजाला’ ने अपने 18 अक्टूबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। तब जाकर प्रशासन जागा और मृतक दिखाए गए लोगों को जिंदा करते हुए उनके खाते में कुल पिछले नौ माह का 3600 रुपये के हिसाब से सभी के खाते में पेंशन भेज दी गई। पेंशन मिलने के बाद सभी पेंशनधारी खुश थे और उन लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। यह लोग आपस में एक दूसरे को बधाई देते हुए कहा कि अगर इस बुढ़ापे में अखबार ने साथ नहीं दिया होता तो हम लोगों को शायद न्याय नहीं मिलता। खुशी मनाने वालों में गुलाब राम, रामदेव यादव, ललिता राम ,फुलझरी देवी ,सुगीया देवी, जनार्दन सिंह यादव, ललिता देवी, सहतू राम एवं कन्हैया आदि लोग शामिल रहे।