गाजीपुर। जिले में पशु तस्करी का खेल जारी है। पुलिस की मिलीभगत से पशु तस्कर रात के अंधेरे में इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। यह सारा खेल पुलिस की जानकारी में होता है। कभी-कभार जब ग्रामीण इसकी शिकायत आला अफसरों से करते हैं, तब पुलिस हरकत में आती है और कार्रवाई में जुट जाती है। लेकिन दो-चार दिन बार पुन: हालात जस के तस हो जाते हैं। अधिकारियों की लाख कोशिशों के बाद भी पशु तस्करी पर लगाम नहीं लग पा रहा है।
जिले से पशुओं को बिहार ले जाने के लिए तस्कर अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। आजमगढ़ से दुल्हपुर के रास्ते जिले में प्रवेश करने के बाद बिरनो, जंगीपुर, रजागंज पुलिस चौकी होते हुए जमानिया कोतवाली के रास्ते गहमर थाने से होकर बिहार चले जा रहे हैं। यह रास्ता थोड़ा घुमावदार जरूर है, लेकिन पूरी तरह रात में सुरक्षित रहता है। जबकि दूसरा रास्ता दुल्हपुर से नोनहरा थाने से होते हुए मुहम्मदाबाद कोतवाली के बालापुर पुलिस चौकी होकर बलिया के नरहीं थाने के भरौली तिराहे से बिहार (बक्सर) को निकलता है। पुलिस मुख्यालय तथा जिले के आला अफसरों के नकेल कसते ही पशु तस्कर पर धड़ाधड़ कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। मवेशी सहित ट्रक, पिकअप और डीसीएम को पकड़ने के बाद पशुओं की बरामदगी दिखाई जाती है और उनको लिखा-पढ़ी में किसी किसान के सुपुर्दगी में दे दिया जाता है। लेकिन पुलिस की मेहरबानी से यह मवेशी पुन: उनके पास पहुंच जाते हैं। ऐसा इस लिए है कि पुलिस पशुओं की बरामदगी कर किसी किसान अथवा पशुपालक को सुपुर्दगी में दे देता है। पशुओं की देर-रेख करने की जिम्मेदारी भी उसी किसान/पशुपालक की होती है। लेकिन मजे की बात यह है कि पशु सुपुर्द किए जाने के चंद दिनों में ही वहां से गायब हो जाते हैं। इस संबंध में थानों से जानकारी लेने पर पता चला कि सुपुर्दगी के बाद उन पशुओं का क्या हुआ, इसका कोई लेखा-जोखा महकमे के पास नहीं है। जबकि बरामद मवेशियों को इस शर्त पर सुपुर्दगी में दिया जाता है कि इन पशुओं को खिलाने-पिलाने से लेकर उनकी देख-रेख करने की पूरी जिम्मेदारी पशुपालक अथवा किसान की होगी। साथ ही पुलिस इसकी देख-रेख करती रहेगी। लेकिन ऐसा धरातल पर नहीं दिखाई दे रहा है। जिले में पशु तस्करों पर थोड़ा भी खाकी का खौफ नहीं दिखाई दे रहा है। इस संबंध में एसपी सोमेन वर्मा ने बताया कि पशु तस्करी को लेकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस की आंख में धूल झोंककर तस्करी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी जारी है। पशुओं के सुपुर्दगी में देने के बाद उनके बारे में पूरी जानकारी थाने स्तर पर रखी जाती है।