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Ghazipur News: नहरों की सफाई पर 3 करोड़ हुए थे खर्च, फिर भी 5 हजार हेक्टेयर खेतों में नहीं पहुंच सका था पानी

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कछुहरा-डंडापुर रजवाहा के दोनों किनारे उगी सरपत-संवाद
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गाजीपुर। किसान रबी सीजन की तैयारी में जुटे हैं लेकिन जिले की नहरों की अब तक सफाई शुरू नहीं सकी। नहरों में जगह-जगह खर-पतवार व सरपत उगे हैं जबकि 63 प्रतिशत किसान अपने फसलों की सिंचाई के लिए नहरों पर निर्भर हैं। गौर करने वाली बात ये है कि नहरों की सफाई के लिए प्रत्येक वर्ष बजट आता है। वर्ष 2024 में भी नहरों की सफाई पर 3 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। इसके बावजूद 5 हजार हेक्टेयर खेत में नहर का पानी नहीं पहुंच सका था। जनपद में 2 लाख 52 हजार 824 हेक्टेयर में खेती का कार्य होता है। जनपद में 5.31 लाख पंजीकृत किसान हैं। नियमानुसार नहरों की सफाई अक्तूबर महीने में शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन नवंबर शुरू होने के बाद भी सफाई नहीं शुरू हो सकी। जनपद में देवकली पंप नहर कैनाल प्रमुख नहर है। यह जनपद के एक बड़े हिस्से में फैला हुआ है। इसकी लंबाई 39.2 किलोमीटर है। इस नहर से 65,173 हेक्टेयेर से अधिक भूखंड में सिंचाई का कार्य होता है। सैदपुर, देवकली, मरदह व कासिमाबाद क्षेत्र के लिए देवकली पंप नहर जीवनरेखा के समान है। करीब 11 लाख से अधिक किसान नहर अपने-अपने खेत की सिंचाई के लिए निर्भर हैं। लेकिन, अधिकांश जगहों पर नहर खर-पतवार, सरपत, घास-फूंस से पटी हुई है।
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90 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से किराये पर लेते हैं पानी-पिछले वर्ष 5 हजार हेक्टेयर खेतों में नहरों से पानी नहीं पहुंच सका था। ऐसे में 30 हजार किसानों को सिंचाई के लिए निजी संसाधनों का सहारा लेना पड़ा था। गांवों में 90 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से सिंचाई के लिए किराये पर किसान पानी लेते हैं। धान व गेहूं की फसल में सिंचाई की अधिक आवश्यकता होती है। एक बीघा खेत की सिंचाई में 6 घंटे का समय लग जाता है। धान की फसल अमूमन 9 बार तक सिंचाई होती है। ऐसे में 30 हजार किसानों ने सिंचाई के लिए 15 करोड़ रुपये की धनराशि वर्ष 2024 में खर्च कर दी थी। सैदपुर के रामाश्रय चौहान, देवकली के बिरजू राम ने बताया कि अगर हर वर्ष मानक के अनुसार नहरों की सफाई होती, तो किसानों को अपने फसलों की सिंचाई के लिए निजी संसाधानों का सहारा नहीं लेना पड़ता।
इन क्षेत्रों में नहरों की नहीं हुई सफाई-गाजीपुर। सैदपुर, देवकली, मरदह, कासिमाबाद, भांवरकोल, भीमापार, दुल्लहपुर, जमानिया, सेवराई, गहमर आदि क्षेत्रों में नहरों की साफ-सफाई नहीं कराई गई है। जनपद के लगभग सभी हिस्सों में नहरों की स्थिति एक जैसी है। लंबी-लंबी उगी घास-फूंस, सरपत व खर-पतवार इसकी गवाही दे रही है।
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केस नंबर एक - मरदह क्षेत्र के कछुहरा, हालपुर, बदलिया, मनियारपुर, दुखुर्शी, डंडापुर होते हुए तेजपुरा स्थित गोधनी नाले में मिलने वाले रजवाहे की सफाई नहीं हुई है। इसकी लंबाई 3 किलोमीटर से अधिक है। सरपत उग आने के कारण जगह-जगह पानी ठहर जाता है। फ्लो में पानी न बहने के कारण किसानों को सिंचाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
केस नंबर दो - भांवरकोल ब्लॉक क्षेत्र में चार दशक पूर्व वीरपुर पंप कैनाल का निर्माण हुआ था। यह कैनाल वीरपुर, बदौली, मिर्जाबाद, मनिया, भांवरकोल, तेतरिया, सुखडेहरा, माटा, धनेठा, नसीरपुर, नरसिंहपुर, बाठा आदि गांवों से होकर गुजरता है। इसकी लंबाई 12.5 किलोमीटर है। इसकी क्षमता 200 बीघा खेत की सिंचाई का है। 1200 किसान इसके ऊपर निर्भर हैं। लेकिन, सफाई नहीं होने के कारण 4 किलोमीटर तक ही पानी जा पाता है। शेष हिस्से के किसान निराश हैं।
केस नंबर तीन - शारदा सहायक नहर आजमगढ़ से शुरू होकर जखनिया तक आती है। यह 15 किलोमीटर लंबी है। जखनिया, रामबन, परसुपुर, कूदनीपुर, मकदुमपुर, जलालपुर, माखनपुर, सदरजहांपुर, शाहबापुर, फूलपुर आदि गांवों के किसान इसके ऊपर निर्भर हैं। नहर के 10 किलोमीटर के हिस्से में पानी ही नहीं आता है।
हर बार नहरों की सफाई सिल्ट तक की जाती है। इस बार बीते दिनों बेमौसम बारिश होने से नहरों में पानी इकट्ठा हो गया है। इसलिए अभी तक नहरों की सफाई शुरू नहीं हो पाई है। 15 नवंबर से नहरों की सफाई का काम शुरू हो जाएगा। - सुबोध गुप्ता, एई, देवकली पंप कैनाल खंड प्रथम
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