गाजीपुर। जनपद की अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार ग्रामीण बाजार हैं। जिले में करीब 27 ग्रामीण बाजार हैं। अनुमान है कि यहां से प्रतिदिन आठ करोड़ पांच लाख रुपये का कारोबार होता है। इन बाजारों पर 35 लाख की आबादी खरीदारी, बैकिंग, स्वास्थ्य, परिवहन अन्य सेवाओं के लिए निर्भर है। लेकिन, किसी भी ग्रामीण बाजार में शौचालय, यूरिनल व पेयजल की सुविधा तक नहीं है। इससे दुकानदारों व खरीदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं ग्रामीण बाजारों से प्रत्यक्ष रूप से 10 हजार 645 परिवारों का भरण-पोषण होता है।
जिले के नगरीय बाजारों में स्थिति कुछ हद तक सही है। लेकिन, ग्रामीण बाजारों में बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। यहां अन्य सुविधाओं की बात करना ही बेमानी है। शौचालय न होने से सबसे अधिक दिक्कत महिला खरीदारों को होती है। यहां तक कि यहां पर यूरिनल तक नहीं है। पेयजल की स्थिति भी ठीक नहीं है। किसी भी ग्रामीण बाजार में वाटर कूलर की व्यवस्था नहीं की गई है। प्यास लगने पर लोगों को दुकानों से कुछ खरीदकर खाना पड़ता है या फिर शुद्ध पेयजल के लिए बोतलबंद पानी की खरीदारी करनी पड़ती है। इससे खरीदारों का अतिरिक्त पैसे खर्च होते हैं। ग्रामीण बाजारों में बुनियादी सुविधाओं को मुहैया कराने के लिए लोगों की ओर से कई बार आवाज उठाई गई, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से ध्यान नहीं दिया गया। इसके कारण ग्रामीण बाजार बदहाली का दंश झेल रहे हैं।
जिले के ग्रामीण बाजार व दुकानों की संख्या
बाजार दुकान
भदौरा 1500
सायर 500
गहमर 1000
खानपुर 500
अनौनी 350
सिधौना 400
औड़िहार 500
बिहारीगंज डगरा 200
हसनपुर डगरा 400
भीमापार 500
अनौनी 200
खानपुर 190
उचौरी 210
बौरवा 250
बारा 90
रेवतीपुर 300
सुहवल 180
ढंढनी 300
कासिमाबाद 700
दुल्लहपुर 600
जखनिया 450
महाराजगंज 550
नंदगंज 675
शौचालय है, लेकिन अदा करना पड़ेगा पैसा
दुल्लहपुर बाजार करीब डेढ़ किलोमीटर की परिधि में है। यहां पर करीब 600 दुकानें हैं। इस ग्रामीण बाजार पर 18 गांवों के लोग खरीदारी व अन्य जरूरतों के लिए निर्भर हैं। दुल्लहपुर बाजार में प्रतिदिन सात हजार लोगों का आवागमन होता है। यहां शौचालय है, लेकिन इसका इस्तेमाल करने के लिए निर्धारित धनराशि भुगतान करना होगा। निशुल्क शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां पर सुलभ शौचालय की व्यवस्था है।
अतिक्रमण की चपेट में बाजार
केस एक
- भदौरा गंगा उस पार क्षेत्र का प्रमुख बाजार है। यहां 1500 दुकानें हैं। क्षेत्र के 23 गांवों के लोग यहां पर प्रतिदिन खरीदारी व अन्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए आते हैं। किसान भी अपने उत्पादों की बिक्री करने के लिए भदौरा बाजार में आते हैं। लेकिन, यहां अतिक्रमण की समस्या प्रमुख है। इससे दुकानदारों व खरीदारों दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
खुली नालियां, उखड़ी इंटरलाकिंग की ईंटें
केस नंबर दो - गाजीपुर-वाराणसी सीमा के नजदीक स्थित औड़िहार बाजार में 500 दुकानें हैं। लेकिन, यह बाजार बुनियादी सुविधाओं के अभाव का दंश झेल रहा है। बाजार में आवागमन के लिए बेहतर मार्ग नहीं है। नालियां खुली हुई हैं। इसके कारण दुर्गंध से दुकानदारों व खरीदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र के 13 गांवों के लोग प्रतिदिन यहां खरीदारी करने के लिए आते हैं।
जनपद की अर्थव्यवस्था को गति देने में ग्रामीण बाजारों की अहम भूमिका है। लेकिन, इनके विकास की ओर ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीण बाजारों में बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त करने की जरूरत है, ताकि दुकानदारों व खरीदारों को सहूलियत मिल सके। - श्री प्रकाश केशरी, जिलाध्यक्ष उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल
ग्रामीण बाजारों में शौचालय नहीं है। इसके कारण खरीदारी व अन्य जरूरतों के लिए बाजार में जाने पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अनीता, बदरपुर चांद
महिलाओं की सुविधा के लिए जिस प्रकार नगरीय क्षेत्रों में पिंक शौचालय है, उसी तर्ज पर इसकी व्यवस्था ग्रामीण इलाकों के बाजारों के लिए भी होनी चाहिए। - ममता, फत्तेसराय
ग्रामीण बाजार रोजगार के एक सशक्त माध्यम हैं। लेकिन, इनकी उपेक्षा की जा रही है। सबसे बड़ी जरूरत यूरिनल की है। इसके कारण काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। - शिवम तिवारी, औड़िहार
ग्रामीण बाजारों में बुनियादी सुविधाओं का ढांचा बेहतर करने की जरूरत है। अच्छी सड़कें, जलनिकासी के लिए नाली, पटरी, पेयजल व प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। - पिंटू पटवा, भीमापार
खानपुर बाजार। संवाद
खानपुर बाजार। संवाद