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गोपाष्टमी पर पूजी गई गौ माता

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जखनियां(गाजीपुर)। गोपाष्टमी का पर्व गुरुवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। लोगों ने श्रद्धा भाव से गायों की पूजा कर मंगलकामनाएं कीं। कुछ जगहों पर गायों को मेहंदी और हल्दी के छापे भी लगाए गए। मान्यता है कि इस दिन गौ माता की पूजा करने से सुख समृद्धि में वृद्धि होती है।
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इस पर्व के महत्व पर चर्चा करते हुए सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने बताया कि गाय में 33 करोड़ देवताओं का वास है, इसलिए गौ पूजन से सभी देवता प्रसन्न होते हैं। इस दिन गाय और गोविंद की पूजा-अर्चना करने से धन और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने पहली बार गाय चराई थी। उनके गाय चराने की जिद पर यशोदा जी ने ऋषि शांडिल्य से कहकर मुहूर्त निकलवाया और गौ चारण के लिए भेजा। इस दिन गौ सेवा करने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता। जिस प्रकार एक मां अपनी संतान को हर सुख देना चाहती है, उसी प्रकार गौ माता भी सेवा करने वाले व्यक्ति को अपने कोमल हृदय में स्थान देती हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं। इस पर्व को जिले भर में श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार मनाया। मान्यता के मुताबिक गौ माता को स्नान कराकर सजाया जाता है। गाय को मेहंदी, हल्दी, रंग के छापे लगाना चाहिए। बछड़े के साथ गौ पूजन करने के विधान हैं, इसलिए बछड़े के साथ गौ माता की पूजा करते हैं। धूप-दीप, अक्षत, रोली, गुड़, वस्त्र और जल से पूजा करके उनकी आरती करते हैं। इसके बाद चारा खिलाया जाता है तथा परिक्रमा किया जाता है। तीर्थ करने के बाद जो पुण्य प्राप्त होता है, वही पुण्य गौ माता के नीचे से निकलने पर मिलता है।
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