करंडा (गाजीपुर)। प्रधानमंत्री का स्वच्छ भारत मिशन करंडा के कई गांवों में मात्र स्लोगन बनता दिखाई दे रहा है। ग्राम प्रधानों और अधिकारियों की मिलीभगत से शौचालय के निर्माण में अनियमितता बरती गई है। अधिकांश गांवों के 50 प्रतिशत घरों में आज भी शौचालय नहीं है। जहां है वहां मात्र ढांचा खड़ा है। इसके कारण ग्रामीण अभी भी खुले में शौच को मजबूर हैं।
प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में शौचालय का निर्माण करा इन्हें खुले में शौच मुक्त करना था। करंडा क्षेत्र के कई गांव में ये प्रयास सिर्फ स्लोगन बनता दिखाई दे रहा है। प्रशासन की ओर से शौचालय निर्माण के लिए 12500 रुपये की प्रोत्साहन राशि लाभार्थी को देनी होती है, लेकिन आरोप है कि प्रधान और पंचायत अधिकारी सात से 10 हजार में ठेका देकर शौचालय बनवा रहे हैं। चर्चा तो यहा तक है कि अधिकांश गांवों में पहले से बने शौचालय को दिखाकर लाभार्थी को सात से नौ हजार रुपये दिए जा रहे हैं। शेष पैसा प्रधान और पंचायत अधिकारी की जेब में जा रहा है। गंगा के किनारे के गांव, जमुआंव, दीनापुर, कुचौरा, गोशंदेपुर, रामनाथपुर, सीतापट्टी, कटारिया, कोरिया, धरम्मरपुर, पुरैना, तुलसीपुर आदि गांवों में रोजाना ग्रामीणों को गंगा के किनारे शौच के लिए जाना पड़ रहा है। सोकनी, बड़हरिया, रफीपुर, तुलसीपुर, नौदर और रामनाथपुर की हालत और भी बदतर है। बड़हरिया के 50 में चार घरों में ही शौचालय है। सोकनी में 50 प्रतिशत घरों में और रफीपुर, तुलसीपुर में 20 प्रतिशत लोगों के पास ही शौचालय है।
मेरी जानकारी में करंडा क्षेत्र के सभी गांवों में शौचालय का निर्माण कार्य पूरा चुका है। अगर किसी का शौचालय नहीं बना है तो जांच कराकर उसका निर्माण कराया जाएगा। -लालजी दुबे, डीपीआरओ।