दुबिहां (गाजीपुर)। बीते दिनों हुई बारिश से एक दर्जन से अधिक गांव में करीब 700 एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई है। ड्रेन का फाटक खुलने पर मंगलवार से पानी तो निकलना शुरू हो गया है, लेकिन किसानों के माथे पर इस बात से चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही है कि यदि पुन: बारिश हुई अथवा समय से पानी नहीं निकला तो फसल चौपट हो जाएगी।
बीते रविवार को पूरे दिन जोरदार बारिश हुई थी। इसकी वजह से हरदासपुर, नेवादा, दुबिहा, गोविंदपुर, पाहुपुर, लालपिपरी, निहालपुर, पखनपुरा, चौरा, गोसलपुर पतार, मुश्तफाबाद, डेहमा, बेनीपुर, बीबीपुर सहित करीब एक दर्जन से अधिक गांवों के किसानों की रोपी गई लगभग 700 एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई है। इससे किसानों की चिंता इस बात से बढ़ गई है कि पानी से फसल बर्बाद हो जाएगी। सिंचाई विभाग द्वारा मंगलवार की सुबह ड्रेन का दूसरा दरवाजा खोल कर पानी निकासी शुरू कराई गई। पानी निकलने की रफ्तार काफी धीमी है। इसे देख किसान इस बात से चिंतित हैं कि यदि समय से पानी नहीं निकला तो फसल बर्बाद हो जाएगी। बातचीत में हरदासपुर के किसान श्रीकांत राय का कहना है कि किसान क्रेडिट कार्ड द्वार बैंक से ऋण लेकर घान की फसल को लगाया था, जो भारी वर्षा के कारण पानी में डूब गई है। यदि समय से पानी नहीं निकला को फसल से हाथ धोना पड़ेगा। पतार निवासी किसान सभा के जिलाध्यक्ष कृपाशंकर सिंह ने कहा कि सूख रही फसलों को बचाने के लिए बारिश का इंतजार कर रहे किसानों की फसल जरूरत से ज्यादा बारिश होने से डूब गई। यदि समय से पानी नहीं निकला तो किसानों की मेहनत पानी में चली जाएगी और किसानों की कमर टूट जाएगी। कहा कि कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच कर स्थित का जायजा लें। जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें किसान बीमा का लाभ जल्द से जल्द मुहैया कराएं। पतार गांव निवासी किसान मित्र गोपाल सिंह, दुबिहा निवासी गौतम राय, बृजेश पांडेय ने कहा कि फाटक खुलने पर पानी तो निकल रहा है, लेकिन उसकी रफ्तार काफी धीमी है। अगर दो दिन के अंदर खेतों से पानी नहीं निकला तो किसानों की मुश्किल बढ़ जाएगी और भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस संबंध में अधिशासी अभियंता एसके शर्मा ने बताया कि तकनीकी खराबी की वजह से दिक्कतें आई थी, इसलिए सिर्फ एक फाटक को ही खोला जा सका था। मंगलवार को दूसरे फाटक को भी खोल दिया गया। जल्द ही खेतों में जमा पानी नदी में चला जाएगा।