कासिमाबाद(गाजीपुर)। छुट्टा एवं आवारा पशुओं के लिए पूर्वांचल सहकारी कताई मिल बड़ौरा के अंदर बनाए गए आश्रय केंद्र में सैकड़ों पशु चारा और पानी के अभाव में जीवन और मौत से जूझ रहे हैं। दो दिनों में पांच मवेशियों की मौत हो गई। जबकि पिछले एक पखवाड़े के अंदर दो दर्जन से अधिक पशु चारा और पानी के साथ ही इलाज के अभाव में दम तोड़ चुके है। ग्रामीणों का कहना है गोवंश आश्रय केंद्र से सटे उपजिला अधिकारी कासिमाबाद का आवास है सटा है। बावजूद इसके संबंधित मवेशियों की देख-रेख में लापरवाही बरत रहे हैं।
मालूम हो कि प्रदेश सरकार के निर्देश के बाद पूरे प्रदेश में हर ग्राम पंचायत स्तर पर छुट्टा एवं आवारा पशुओं के लिए आश्रय केंद्र बनाए गए हैं। कासिमाबाद विकास खंड का सबसे बड़ा आश्रय केंद्र पूर्वांचल सहकारी कताई मिल बड़ौरा के अंदर बनाया गया है। इस आश्रय केंद्र में इस समय लगभग तीन सौ से ऊपर पशुओं को ठहराया गया है। आश्रय केंद्र की देखभाल के लिए खंड विकास अधिकारी कासिमाबाद को नामित किया गया है। यही कारण है कि इस आश्रय केंद्र को सफाई कर्मियों के भरोसे चलाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इधर एक पखवारे के अंदर दो दर्जन से भी अधिक पशु चारा और पानी के अभाव में दम तोड़ चुके है। पशुओं को खिलाने-पिलाने के लिए शासन से जब धन आवंटित हुआ है तो इनको भरपूर मात्रा में चारा आदि क्यों नहीं दिया जा रहा है। भूख से तड़पकर मरने वाले पशुओं का जवाब देह कौन होगा। बुधवार और गुरुवार को मिलाकर अब तक पांच पशुओं की मौत हो गई। अगर प्रशासन समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया तो धीरे-धीरे यहां के सभी पशु दम तोड़ देंगे। ग्रामीणों ने कहा कि उपजिला अधिकारी कासिमाबाद मंसा राम वर्मा का आवास आश्रय केंद्र सटे मिल के अंदर है। बावजूद इसके पशुओं के देख-रेख में लापरवाही बरती जा रही है। इस संबंध में उपजिला अधिकारी मंसाराम वर्मा ने कहा कि मैं बाहर हूं। यदि ऐसा है तो अभी संबंधितों से संपर्क करता हूं। आश्रय केंद्र में लापरवाह किसी भी हाल में बर्दास्त नहीं की जाएगी। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।