जिले में धान खरीद का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने में गिनती के दिन रह गए हैं और अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष करीब 66 फीसदी यानी एक लाख 70 हजार मीट्रिक टन से कुछ अधिक की खरीद जैसे-तैसे हो पाई है। अब खरीद का लक्ष्य पाना मुमकिन नहीं है। ऐसा होने के पीछे क्रय केंद्रों पर किसानों के साथ भेदभाव किया जाना, उन्हें परेशान करना, धान का उचित मूल्य न देना रहा है। जिले के आला अफसर और विभागीय अधिकारी इसे लेकर चिंतित
शासन की ओर से इस वर्ष जिले को धान खरीद का बंपर लक्ष्य निर्धारित किया गया था। पिछले वर्ष दो लाख एमटी से कुछ ज्यादा की तुलना में इस बार दो लाख 58 हजार एमटी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। खरीद के लिए विभिन्न संस्थाओं को लक्ष्य निर्धारित करते हुए 104 क्रयकेंद्र खोले गए। इसमें विपणन के 16, पंजीकृत सहकारी समिति के 29, पीसीएफ के 17, पीसीयू, यूपी एग्रो के 3-3, कर्मचारी कल्याण निगम एवं एनसीसीएफ के 4-4, एफसीआई का 1 तथा एनसीएमएल के 27 क्रयकेंद्र खोले गए। देर से आवक होने के कारण जिले में धान की खरीद नवंबर महीने में शुरू हुई। प्रारंभ से खरीद में तेजी नहीं आ सकी। मिली जानकारी के अनुसार 22 फरवरी तक विभिन्न संस्थाओं की तरफ से एक लाख 70 हजार 47.708 एमटी धान की खरीद की गई है। यह कुल लक्ष्य का 65.91 प्रतिशत है। धान की यह खरीद 15 हजार 834 किसानों से की गई है। धान की जो खरीद हुई है उसमें विपणन शाखा और पंजीकृत सहकारी समिति ने लक्ष्य 90 हजार एमटी की तुलना में कृमश: 31909.080 तथा 94679.345, पीसीएफ ने 35 हजार के सापेक्ष 9897.123 तथा पीसीयू ने 3 हजार के सापेक्ष 4176. 100 एमटी की खरीद की। इसके अलावा यूपी एग्रो ने 15 हजार की तुलना में 2707.16, कर्मचारी कल्याण निगम ने 17 हजार के सापेक्ष 3520, एनसीसीएफ ने 11 हजार की तुलना में 8635.10, एफसीआई ने 2 हजार के सापेक्ष 2201.800 तथा एनसीएमएल ने 85 हजार की तुलना में 12322 एमटी की खरीद की। खरीद के लिए निर्धारित अवधि समाप्त होने में गिनती के दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में शासन की ओर से निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करना मुनासिब नहीं दिखाई दे रहा है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मानक के अनुरूप धान की खरीद की गई है। मानक के अनुरूप धान को केंद्र से वापस नहीं जाने दिया गया। किसानों को समय से भुगतान दिलाने का प्रयास किया गया।
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साढ़े 15 हजार से अधिक किसानों से हुई खरीद
गाजीपुर। जिले में एक लाख 70 हजार 47.708 एमटी की खरीद 15834 किसानों से की गई है। इसमें विपणन ने 3431, पंजीकृत सहकारी समिति ने 8393, पीसीएफ ने 1185, पीसीयू ने 354, यूपी एग्रो ने 251 तथा कर्मचारी कल्याण निगम ने 236 किसानों से खरीद की है। इसके अलावा एनसीसीएफ ने 530, एफसीआई 276 तथा एनसीएमएल ने 1178 किसानों से धान की खरीद की।
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बिचौलियों के माध्यम से क्रय केंद्र पर बिका धान
गाजीपुर। जिले में खोले गए धान क्रय केंद्रों पर किसानों से कम बिचौलियों के माध्यम से ज्यादे धान की खरीद हुई है। इससे बड़े किसान आहत हैं। किसानों का आरोप है कि धान कमजोर और उसमें नमी बताकर उसे लेने से मना कर दिया गया। ऐेसे में किसान कई दिनों तक क्रय केंद्र का चक्कर काटने के बाद उसे औने-पौने दाम में बिचौलियों को बेचना उनकी मजबूरी बन गया। किसानों का बेचा धान पुन: क्रय केंद्र प्रभारी और राइस मिलरों की मिली भगत से क्रय केंद्रों पर खरीदा गया और मिलरों को सौंप दिया गया। जबकि सिस्टम से नाखुश बहुत किसानों ने धान को अन्यत्र बेच दिया। इस कारण क्रय केंद्रों पर धान की खरीद काफी कम हुई। कागजी खानापूर्ति के लिए छोटे किसानों का धान जरूर खरीदा गया, लेकिन उन्हें भी इसके लिए काफी जलालत झेलनी पड़ी। धान खरीद में बिचौलिए, मिलर तथा क्रय केंद्र के अधिकारी और कर्मचारियों की चांदी रही। लेकिन किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। किसान जयप्रकाश राय, अमर नाथ, कपिलमुनी राय, सिद्धनाथ, ओम प्रकाश, अखिलेश राय आदि ने कहा कि इस साल धान खरीद में अफसरों के दिलचस्पी न लेने और किसानों को नाहक परेशान करने से खरीद का लक्ष्य काफी पीछे रह गया है।