दिलदारनगर। एक तरफ जहां प्रदेश सरकार ने 15 जून को सड़कों को गड्ढामुक्त करने का फरमान जारी किया था। वहीं रक्सहा बाईपास मार्ग इस कदर गड्ढे में तब्दील हुआ कि इस पर सात माह से आवागमन बंद है। पैदल आवागमन करने वाले किसी तरह पटरी से लड़खड़ाते हुए आवागमन कर रहे हैं लेकिन चार पहिया वाहनों को काफी दूरी तय कर सैयदराजा होते हुए हाइवे पर पहुंचना पड़ रहा है। मार्ग को दुर्दशा से न उबारे जाने से लोगों में निराशा के साथ ही जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी गहराती जा रही है।
उत्तर प्रदेश को बिहार से सीधे जोड़ने के लिए रक्सहा बाईपास एकमात्र मार्ग था। इससे इस मार्ग पर चौबीसों घंटा चार पहिया वाहनों का दबाव बना रहता था। धीरे-धीरे यह मार्ग खस्ताहाल होता गया। बावजूद इसके संबंधित विभाग इसकी मरम्मत के प्रति गंभीर नहीं हुआ। इसका परिणाम यह हुआ कि मार्ग पूरी तरह से बेजार होकर ऐसे गड्ढों में तब्दील हो गया, जिसके बीच वाहनों की कौन कहे, पैदल निकल पाना भी लोगों के लिए मुश्किल भरा हो गया। आखिरकार सात माह पहले वाहन चालकों ने मार्ग से तौबा कर लिया। इससे सात माह से मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से ठप है। पैदल आवागमन करने वाले किसी तरह से पटरी के सहारे आ-जा रहे हैं। मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर से बिहार को जाने वाले ट्रकों सहित अन्य चार पहिया वाहन काफी दूरी तय कर सैयदराजा होते हुए हाइवे पर पहुंचने को विवश हो रहे हैं। मार्ग को दुर्दशा से न उबारे जाने से लोगों में निराशा के साथ ही जनप्रतिनिधियों के प्रति रोष गहराता जा रहा है।
जिलाधिकारी के बालाजी के अनुसार सड़क की मरम्मत के लिए धनराशि स्वीकृत हो गई है। आचार संहिता लागू है। आचार संहिता समाप्त होते ही सड़क की मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।
जब प्रदेश सरकार ने 15 जून तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने का फरमान जारी किया तो यह आस जगी कि चलो अब इस सड़क की बदहाली दूर हो जाएगी लेकिन सड़क गड्ढामुक्त नहीं हुई और इस पर आवागमन बंद हो गया। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा। उपेंद्र कुमार
वजह से चारपहिया वाहनों ने इससे मुंह मोड़ लिया है। सड़क के गड्ढे में वाहन के फंसने पर उन्हें परेशानी न झेलनी पड़ी, इसके लिए इस मार्ग का उपयोग ही करना बंद कर दिया है। पैदल आवागमन करने में भी लोगों को काफी कष्ट हो रहा है। आनंद कुमार