गाजीपुर। गाजीपुर सिटी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर आए दिन खुले में सीमेंट उतारा जाता है। सीमेंट व धूल उड़ने से प्लेटफार्म, स्टेशन परिसर और कार्यालय तक पट जाता है। यहां से होकर गुजरने वाली ट्रेनों में भी इस कदर सीमेंट भर जाता है कि लोगों को बचने के लिए खिड़की और दरवाजे तक बंद करने पड़ते हैं। सर्वाधिक परेशानी इस प्लेटफार्म पर दुकान संचालकों को होती है। इस समस्या से यात्री ही नहीं रेलवे के कर्मचारी भी कसक रहे हैं। बहुतों ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन इसके समाधान के लिए कोई पहल आज तक नहीं की गई। खास बात यह है कि समस्या से पीड़ित यात्री रेलवे के अधिकारियों के साथ ही जनपद के सांसद व रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को कोस रहे हैं।
गाजीपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुगमता के लिए कुल तीन प्लेटफार्म बनाए गए हैं। लेकिन प्लेटफार्म नंबर तीन पर आए दिन मालगाड़ी खड़ी रहने से ट्रैक जाम रहता है। कभी-कभी ऐसा देखने को मिलता है कि तीन नंबर प्लेटफार्म खाली है और उस पर दूसरी ट्रेनों का संचालन हो रहा है। प्लेटफार्म नंबर तीन पर ही मालगाड़ी का सारा सामान उतारा जाता है। सबसे खतरनाक स्थिति उस समय पैदा हो जाती है, जब करीब हर हफ्ते सीमेंट का रैक गाजीपुर आता है। सीमेंट से लदी मालगाड़ी को खाली करने में दो से तीन दिन लग जाते हैं। सीमेंट को प्लेटफार्म नंबर तीन पर भी उतारा जाता है। इससे पूरा प्लेटफार्म, रेलवे परिसर, प्लेटफार्म की दुकानें तथा रेलवे के विभिन्न कार्यालयों में सीमेंट और धूल भर जाता है। ऐसा इस लिए हैं कि मालगाड़ी से सीमेंट ले जाने के लिए एक साथ 40 से 50 ट्रक प्लेटफार्म नंबर तीन से सटे कच्चे रास्ते से स्टेशन तक पहुंचते हैं। इससे सीमेंट और धूल दोनों पूरे स्टेशन पर भर जाती है। इस दौरान ट्रेन पकड़ने वाले यात्रियों के आंख, नाक, कान और पूरे शरीर तक पहुंच जाता है। सबसे अधिक मुसीबत उन लोगों की है, जो ज्यादातर समय रेलवे स्टेशन पर रहते हैं। रेलवे के दुकानदार, कर्मचारी और अधिकारी इस समस्या से निजात चाहते हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। कई साल से यह समस्या धीरे-धीरे नासूर बनती जा रही है। लेकिन इसका कोई सामाधान नहीं निकल पा रहा है। इस संबंध में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी आरके सिन्हा ने बताया कि सीमेंट व धूल दोनों स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक हैं। सीमेंट शरीर के भीतर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इससे कई तरह की बीमारियां जन्म लेती हैं। इससे जितना हो सके दूर रहने में ही भलाई है। ऐसा नहीं हुआ तो लोगों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि गाजीपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म कम होने की वजह से फिलहाल तीन नंबर पर सीमेंट सहित अन्य सामान उतारा जाता है। इसका विकल्प तलाश जा रहा है। प्रस्ताव बनकर तैयार है। बहुत जल्द इस पर काम शुरू होगा।
घंटों सफाई में जुटे रहते हैं कर्मचारी
गाजीपुर। मालगाड़ी से सीमेंट को उतारते वक्त पूरा प्लेटफार्म और रेलवे स्टेशन इससे पट जाता है। इसके बाद सुबह और शाम कर्मचारियों को इसकी साफ-सफाई करने में घंटों लग जाता है। यह कर्मचारियों के लिए रोजमर्रा का काम हो गया है। यात्रियों की शिकायत पर अधिकारियों ने इस समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है, लेकिन आज भी यह समस्या जस की तस बनी हुई है।
-बलिया निवासी महावीर ने कहा कि मैं प्रतिदिन कारोबार करने के लिए गाजीपुर आता हूं। प्लेटफार्म पर सीमेंट का रैक उतारे जाने से कभी-कभी पूरे शरीर को गमछे और तौलिए से ढंकना पड़ता है। यहां धूल और सीमेंट उड़ने से कुछ देर तक ठहरना मुश्किल हो जाता है।
-ताजपुर डेहमा निवासी रमेश कुमार का कहना है कि गाजीपुर सिटी स्टेशन का काफी विकास किया गया, लेकिन प्लेटफार्म कम होने तथा मालगाड़ी से सामान को उतारे जाने की व्यवस्था अलग से न करने की वजह से प्लेटफार्म नंबर तीन हमेशा अवरुद्ध रहता है। यहां सबसे अधिक परेशानी सीमेंट उतरने से होती है।