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जिले से दूर है गंगा निर्मलीकरण अभियान

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गाजीपुर।
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गंगा सहित सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सरकारी स्तर पर चलाई जा रही योजनाएं पूरी तरह से फ्लाप हो चुकी हैं। जिले में गंगा निर्मलीकरण अभियान की जमीनी हकीकत दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रही है। नदियों को साफ-सुथरा रखने के लिए जागरूकता अभियान के लिए कुछ निजी संस्थाओं ने प्रयास किया।
शासन की ओर से चलाए जा रहे अभियान का और न ही बजट का जिले स्तर पर कोई कार्य दिखाई पड़ रहा है। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने और लोगों को इस संबंध में जागरूक करने के लिए समाज सेवी ब्रजभूषण दूबे की ओर से गंगा के घाटों की सफाई की गई। इतना ही नहीं एक फैक्ट्री से निकलने वाली गंदगी पर रोक लगाने प्रयास किया गया। अतंत: उनका प्रयास सफल हुआ और तत्कालीन डीएम संजय खत्री ने रोक लगा दी। समाजसेवी श्री दूबे ने बताया कि सरकार ने गंगा के मध्य धारा से दो किमी के दायरे में पॉलिथीन की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ अलग ही है। इसी तरह शहर के पक्का घाट, पत्थर घाट सहित अन्य घाटों पर कूड़े का अंबार लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि गंगा की तलहटी में पॉलिथीन का अंबार लगा हुआ है जो गंगा के पानी को विषैला बनाता जा रहा है। राइजिंग यूथ ट्रस्ट के वर्चस्व पांडेय ने बताया कि गंगा को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए 15 सप्ताह तक रविवार को दो घंटे धरना देने के बाद साफ-सफाई की गई। उन्होंने बताया कि गंगा में बह रहे नालों के पानी को शुद्ध करने के लिए आज तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक नहीं लगवाया गया। सरकार द्वारा गंगा के जल स्तर को लेकर भी कुछ निर्धारित नहीं किया गया। बताया कि 15 सप्ताह तक चलाए गए अभियान से जागरूक हुए बस्ती के लोगों ने गंगा के किनारे गंदगी करना बंद कर दिया लेकिन शासन की ओर से चलने वाला निर्मलीकरण अभियान आज तक जिले में नहीं दिखाई पड़ा।
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गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए स्वच्छता कार्यक्रम चलाने के साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है। गंगा में दूषित पानी और कचरा जाने से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। - के बालाजी, जिलाधिकारी
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