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अनाथ बच्चों के सिर पर समाजसेवी ने ओढ़ाई राहत की चादर

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करंडा(गाजीपुर)। अपने और अपने परिवार के बारे में तो सभी सोचते हैं, लेकिन दूसरों के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा कम लोगों में ही होता है। यह बातें समाजसेवी संतोष पांडेय पर बिल्कुल सटीक बैठती है। पहले पिता और बाद में चार बच्चों के सिर से मां का साया उठने पर बच्चों को तात्कालिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही उसकी तेरही करने का बीड़ा उठाया है। यही नहीं संतोष ने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के साथ ही बेसहारा हो गई तीनों लड़कियों का हाथ पीला कराने का भी संकल्प लिया है।
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करंडा क्षेत्र के नौदर निवासी लक्ष्मण प्रसाद मजदूरी करके अपनी छह बेटियों और एक बेटे का पेट किसी तरह से भरता था। गर्मी में तो उसके परिवार की रात आराम से कट जाती थी, लेकिन जाड़े के मौसम में गरीबी की चादर ओढ़े ठिठुरते हुए परिवार की सुबह होती थी। इसी बीच लक्ष्मण को क्षय रोग (टीबी) ने जकड़ लिया। गरीबी की चादर ओढ़े वह इस रोग से संघर्ष करता रहा। इसी संघर्ष के बीच उसने किसी तरह अपनी तीन बेटियों पूनम, बबिता और डिंपल का हाथ पीला किया। ठीक से उपचार न होने की वजह से एक वर्ष पहले लक्ष्मण की मृत्यु हो गई। पत्नी हीरावती पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उसके सामने बेटी रायना (17), अंतिमा (13), आरती (11) और बेटा शुभम (9) का पेट भरने के साथ ही पालन-पोषण की समस्या चुनौती के रूप में खड़ी हो गई। वह किसी तरह दूसरे के खेतों और घरों में काम कर बच्चों का पालन-पोषण करती रही। इसी बीच हीरावती भी टीबी रोग का शिकार हो गई। इसी बीमारी से लड़ते हुए बीते शनिवार को उसकी मौत हो गई। गांव के ही सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वाभिमान संगठन के उपाध्यक्ष सोनू सिंह और अभिषेक सिंह ने रविवार को क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी मौनी बाबा सेवा दल के अध्यक्ष तथा स्वाभिमान संगठन के संरक्षक संतोष पांडेय से पीड़ित परिवार की व्यथा मोबाइल से सुनाई। संतोष पांडेय ने तुरंत अपने भाई सबुआ के ग्राम प्रधान मनोज पांडेय को भेजकर तत्काल परिवार को ढाई हजार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराया। उनकी मां की तेरही का वह पूरा खर्च उठाने के साथ ही चारों बच्चों की पढ़ाई और बेसहारा हुई तीनों लड़कियों की शादी अपने खर्च पर कराएंगे। मालूम हो कि संतोष पांडेय महाराष्ट्र में कारोबार करते हैं और महीने में कई बार वह गांव में आते हैं।
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