गाजीपुर। सैदपुर तहसील अंतर्गत महोलिया गांव के पास गुरुवार को एनएच 29 सहित अन्य सड़कों के चौड़ा होने में बाधा बन रहे वृक्षों की कटाई के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता पीपल के वृक्ष की डाली में रस्सी बांधकर उसे चूमते हुए पर्यावरण के नारे लगाते हुए प्रतीकात्मक रूप से फांसी पर झूल गए। कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके नारे की तरफ ध्यान दिलाया, जिसमें वह हरियाली लाने की बात करते हैं।
सामाजिक संस्था समग्र विकास इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजभूषण दुबे के साथ कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर प्रदेश एवं केंद्र सरकार एनएच 29 सहित अन्य सड़कों के चौड़ा होने में बाधा बन रहे वृक्षों का प्लांटेशन नहीं कराती है तो हम आने वाली जेनरेशन तथा पर्यावरण को बचाने के लिए अपनी जान दे देंगे। इस परिप्रेक्ष्य में ब्रजभूषण दुबे द्वारा कई माह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोर्टल पर इस आशय का निवेदन ज्ञापित किया गया था, जिस पर उनकी ओर से प्रदेश सरकार को आदेशित किया गया। अपर मुख्य सचिव स्तर से मामला वाराणसी के डीएफओ तक पहुंचा। प्रभागीय वनाधिकारी वाराणसी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि एनएच 29 के पेड़ों का कटना बहुत दुखद है। पर्यावरण का नुकसान हो रहा है। धरती गरम हो रही है लेकिन प्लांटेशन के लिए उनके पास मशीनें नहीं है और यह राज्य सरकार का नीतिगत मामला है। संस्था के प्रदेश महामंत्री सनाउल्लाह ने कहा कि इस्लाम में दरख्त का बड़ा महत्व है। सामाजिक कार्यकर्ता सचिदानंद पांडेय ने कहा कि महोलिया स्थित पीपल के युवा वृक्ष को बचाने के लिए कई बार स्थानीय लोगों ने हरि कीर्तन एवं रामायण पाठ भी किया लेकिन वन विभाग तथा प्रदेश एवं केंद्र सरकार ध्यान नहीं दे रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना था कि अगर 21 जुलाई तक प्रदेश एवं केंद्र सरकार वृक्षों को बचाने का कोई आश्वासन नहीं देती तो हम वाराणसी से गोरखपुर के बीच कहीं भी किसी वृक्ष की डाली में रस्सी बांध, फंदा लगा अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेंगे। यह निर्णय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों से आच्छादित है, जिसके लिए सीधे तौर पर प्रदेश एवं केंद्र सरकार तथा संबंधित विभाग जिम्मेदार होगा। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद अकरम, प्रमोद यादव, अनिल कुमार, कन्हैया लाल यादव, प्रमोद कुशवाहा आदि उपस्थित थे। संचालन संगठन के व्याख्याता गुल्लू सिंह यादव ने किया।