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अंजुम समेत 16 साहित्यकारों का सम्मान

Wed, 23 Sep 2015 11:34 PM IST
संवाददाता/ अमर उजाला, गाजीपुर
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हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने की दिशा में प्रयासरत गजलकार प्यासा अंजुम समेत 16 साहित्यकार गहमर वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित साहित्यकार सम्मेलन में सम्मानित किए गए। 19 से 22 सितंबर तक आयोजित इस
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कार्यक्रम का समापन मंगलवार की रात किया गया। समारोह के चौथे दिन जीवन मेेें साहित्य का महत्व और अपने जीवन को कैसे सुधारें विषय पर परिचर्चा हुई। शाम को कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस

मौके पर मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह के प्रतिनिधि मन्नू सिंह ने जम्मू एवं कश्मीर के गजलकार प्यासा अंजुम को पंडित शीलता प्रसाद उपाध्याय स्मृति सम्मान, मुक्तक के क्षेत्र मे लखनऊ के प्रो. विश्म्भर शुक्ल को विश्वनाथ
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सिंह गहमरी सारस्वत सम्मान, रायपुर छत्तीसगढ के उपन्यासकार गिरीश पंकज को अवधेश सिंह सारस्वत सम्मान, पत्रकारिता के क्षेत्र में मद्रास के ईश्वर करुण को दिलीप सिंह सम्मान, व्यंग्य और आलोचना के क्षेत्र में दिल्ली के सुभाष

चंदर को अमर सिंह नल सारस्वत सम्मान, हिंदी साहित्य की सर्वश्रेष्ठ वेबसाइट ओपेन बुक ऑनलाइन को स्व. आशीष शुक्ला सारस्वत सम्मान, हास्य व्यंग्य के क्षेत्र में सिवनी मध्य प्रदेश के रामकुमार चतुर्वेदी को धाम देव राव सारस्वत

सम्मान प्रदान किया। इसी क्रम में संगीत शिक्षक के रूप में भोपाल मध्यप्रदेश की कान्ति शुक्ला को सोना देवी स्मृति सम्मान, कवयित्री नागपुर मध्यप्रदेश की रमा वर्मा को डा. सुनील सिंह सारस्वत सम्मान, हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट

कार्य के लिए कानपुर की विकासिता एवं गाजीपुर के साहित्य चेतना समाज संस्था को योगेश्वर सिंह सम्मान, कवि ओम नीरव को मान्धाता सिंह सम्मान, हिंदी प्रचारक के रूप में अजमेर राजस्थान के संदीप अवस्थी को रामयश सिंह

तहसीलदार सम्मान, कानपुर के पत्रकार डा. कमलेश द्विवेदी को साहित्य सरोज गौरव सम्मान, विदेश में हिंदी भाषा के उत्थान पर काम के लिए अमेरिका से आईं अर्चना पांडा को पंडित कपिल देव द्विवेदी सम्मान प्रदान किया गया।

उधर, जीवन में  साहित्य का महत्व विषयक परिचर्चा में गिरीश पंकज ने कहा कि साहित्य किसी भाषा की मोहताज नहीं। किसी भी बोली या भाषा का अपना इतिहास होता है। पटना के गणेश बागी, राजस्थान के संदीप अवस्थी, भोपाल के

अशोक व्यग्र, दानिश जयपुर ने परिचर्चा में हिस्सा लिया। इस मौके पर प्यासा अंजुम ने कहा कि रचना करते समय उपमाओं का ध्यान  रखना चाहिए। प्रो. विश्वम्भर शुक्ला, रमा वर्मा, प्रमिला आर्या ने रचनाओं में निरंतर सुधार के तरीके
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