मुहम्मदाबाद(गाजीपुर)। जीवन में जब सौ जन्म का पुष्पोदय होता है तभी रामकथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। देव दुर्लभ मानव तन रामजी की ही कृपा से प्राप्त होता है। इस भव सागर से तरने का सुगम साधन मानव तन ही है। यह सुवचन कथावाचक मानस मर्मज्ञ यमुना प्रसाद ओझा ने लौवाडीह में संगीतमय रामकथा के प्रथम दिन कही।
उन्होंने बताया कि श्रीरामजी के चरित्र का वर्णन विविध रामायण ग्रंथों में वर्णित है। संसार में चार प्रकार के भक्त होते हैं। अति जिज्ञासु अर्थार्थी तथा ज्ञानीभक्त सभी भक्त रामजी के प्रिय हैं। ज्ञानी भक्त रामजी को विशेष प्रिय है। श्रीरामकथा श्रवण से सरलता पूर्वक इस भवसागर से पार पा सकते हैं। जो वस्तु हम खाते हैं, वह मलमूत्र के द्वारा बाहर आ जाता है लेकिन जो हम श्रवण करते हैं वह मुख से बाहर निकलता है। इसलिए हम रामकथा का श्रवण करेंगे तो उसी प्रकार के विचार हमारे मुख से निकलेंगे। मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य राधेरमण ने दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। यहां सांसद प्रतिनिधि प्रमोद राय, पारसनाथ पांडेय, रविंद्रनाथ राय, श्यामराज तिवारी, रामचंद्र राय, कृष्णानंद राय, संजू राय, सोनू राय, राजेश राय, पिंटू, शशिकांत, प्रेमचंद गुप्ता, ओमप्रकाश शर्मा, सतीश राय, मनोज राय, विजयशंकर पांडेय आदि रहेे।