गाजीपुर। अपनी ग्यारह सूत्री मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश राजस्व निरीक्षक संघ के नेतृत्व में राजस्व निरिक्षकों ने मंगलवार को सरजू पांडेय पार्क में धरना-प्रदर्शन किया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि हमारी मांगें जायजा है। मांगों के पूरा होने तक हमारा संघर्ष चलता रहेगा।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश में समस्त राजस्व निरीक्षक संवर्ग की अंतिम ज्येष्ठता सूची प्रकाशित के साथ ही प्रदेश में समस्त राजस्व निरीक्षकों का स्थायीकरण वाषि प्रवृष्टि अद्यतन कराई जाए। प्रदेश में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर 2005 में कुछ लेखपाल राजस्व निरीक्षक पद का प्रशिक्षण प्राप्त किए, है, उनका परीक्षा फल घोषित कर स्थायीकरण कराया जाए। राजस्व निरीक्षक संवर्ग की उत्तर प्रदेश अधिनस्थ राजस्व कार्यपालक नियमावली में दी गई नायब तहसीलदार पद पर प्रोन्नति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वर्तमान समय में राजस्व निरीक्षक को स्टेशनरी के रूप में छह रुपए प्रतिमाह मिल रही है, जिसमें एक अच्छी पेन भी नहीं मिल सकती। जबकि लेखपाल को स्टेशनरी के रूप में सौ रुपये तथा लेखपाल उत्तराखंड को 500 रुपया प्रतिमा मिल रहा है। अत: राजस्व निरीक्षक की स्टेशनरी 15 सौ रुपया प्रतिमाह किया जाए। कहा कि राजस्व निरीक्षक संवर्ग को 25 रुपया प्रतिमाह नियत भत्ता के रूप में मिल रहा है, जो एक दिन क्षेत्र में जाने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। लेखपाल को नियत भत्ता के रूप में सौ रुपये किसान सहायक को सात सौ रुपये, आपूर्ति निरीक्षक को सात सौ रुपये तथा राजस्व निरीक्षक उत्तराखंड को 12 सौ रुपये प्रतिमाह मिल रहा है। अत: राजस्व निरीक्षकों को नियत यात्रा भत्ता तीन हजार रुपये प्रति माह दिया जाए। प्रदेश में लेखपालों को जिन कार्यों को लेकर विशिष्ट सेवा भत्ता सौ रुपया प्रतिमाह मिल रहा है, उन्हीं सब कार्यों का सम्पादन राजस्व निरीक्षक संवर्ग द्वारा कराया जाता है, लेकिन राजस्व निरीक्षकों को विशिष्ट सेवा भत्ता नहीं मिलता है, राजस्व निरीक्षकों को विशिष्ट सेवा भत्ता कम से कम सौ रुपया प्रतिमाह दिया जाए। कहा कि इसके अलावा हमारी अन्य मांगें भी है। मांगों के पूरा होने तक हम संघर्ष से पीछे हटने वाले नहीं है। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष लालता यादव, राकेश कुमार यादव, भोलाशंकर राय, शेषमणि गोंड, यमुना यादव, लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष विनोद यादव, लेखपाल संघ के जिला महामंत्री रामखेलावन राम, राजेश कुमार, रानवचन शर्मा, जयप्रकाश सिंह, वंशीधर दुबे, शिवनाथ राम, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता आदि उपस्थित थे।