बहरियाबाद(गाजीपुर)। स्थानीय कस्बा स्थित पशु चिकित्सालय में चिकित्सक का अभाव बना हुआ है। पूर्व में कार्यरत पशु चिकित्साधिकारी के स्थानांतरण के एक माह बीत जाने के बाद भी किसी चिकित्सक ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। बीमार पशुओं को लेकर दर-दर भटक रहे पशुपालकों को मजबूरी में झोलाछाप चिकित्सकों की शरण लेनी पड़ रही है। ऐसे में जहां पशुपालकों का आर्थिक शोषण हो रहा है, वहीं कई बार उचित इलाज के अभाव में उन्हें पशुओं से भी हाथ धोना पड़ रहा है।
दर्जनों गांवों का प्रतिनिधित्व करने वाला कस्बा स्थित एक मात्र पशु चिकित्सालय स्वयं बीमार हो चुका है। अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा यह चिकित्सालय को एक चिकित्सक की दरकार है। पूर्व में कार्यरत पशु चिकित्साधिकारी का स्थानांतरण विगत 14 जून को अन्यत्र हो गया। इसके बाद से यह चिकित्सालय फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। चिकित्सक के अभाव में पशुओं का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थिति में इन पशुपालकों का आर्थिक शोषण तो हो ही रहा है। फार्मासिस्ट संतोष कुमार ने बताया कि एक चिकित्साधिकारी, एक फार्मासिस्ट एवं दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सापेक्ष वर्तमान में केवल वह ड्यूटी कर रहे हैं। जर्जर भवन के संबंध में कहा कि कई बार लिख कर दिया जा चुका है। विधानसभा चुनाव से पूर्व बजट की व्यवस्था हो गई थी लेकिन चुनाव के बाद वापस चला गया। पुन: उच्चाधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया लेकिन अभी तक इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया। कस्बा निवासी हेशामुद्दीन, सुभासपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष दानिशवरा, अशोक यादव, विनोद यादव आदि ने संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए शीघ्र पशु चिकित्साधिकारी को नियुक्त करने की मांग की है। इस संबंध में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विद्याशंकर ने कहा कि चंदौली से स्थानांतरित होकर चिकित्सक आए थे। 14 जून को आदेश जारी हो गया था, लेकिन बाबू के अस्वस्थ होने के कारण पत्र नहीं ले सके। चार दिन पहले उन्हें पत्र दे दिया गया है। अगर वह बहरियाबाद नहीं पहुंचे तो उनसे जवाब तलब किया जाएगा। तत्काल बहरियाबाद भेजा जाएगा ताकि वह कार्यभार ग्रहण कर सकें।