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गिरते भू जल व नदियों के प्रदूषण से बढ़ रहा जल संकट

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गाजीपुर। जिले में पेयजल संकट गहरा सकता है। गर्मी की शुरूआत होते ही गिरते भू-जल स्तर को लेकर भूगोलविद और विभागीय अधिकारी चिंतित हैं। नदियों का पानी तेजी से प्रदूषित होने और पानी योग्य न रहने तथा कहीं सूूखते, तो सिमटते पाट। पानी के स्रोतों से पानी का भारी दोहन भी गिरते भू जल की ओर संकेत कर रहा है। पानी को संरक्षित रखने का काम कागजों पर हुआ है। गर्मी में 30 से 40 प्रतिशत शहरी क्षेत्र भी भू-जल के संकट से जूझ सकता है। शहर में वाटर लेबल खतरनाक बताया जा रहा है।
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गर्मी के दिनों में हैंडपंपों का वाटर लेबल नीचे जाने के पीछे भू-जल का जमकर दोहन करना है। दूसरी तरफ नदियों में गिरने वाले नालों की वजह से वह प्रदूषित होती जा रही हैं। नगर क्षेत्र में वाटर लेबल नौ से दस मीटर है। इसी क्रम में करंडा, मनिहारी में जलस्तर सात मीटर के करीब है। जबकि शादियाबाद, जखनियां, दुल्हपुर, भीमापार में आठ से नौ तक पहुंचा है। गर्मी धीरे-धीरे बढ़ने के साथ ही वाटर लेबल भी नीचे की तरफ खिसकता जा रहा है। ऐसे में इंडिया मार्का हैंडपंप भी पानी छोड़ने लगे हैं। पांच फीसदी हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। कुएं और तालाबों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। नदियां भी सिकुड़ती जा रही हैं। गंगा के साथ जनपद में सहायक नदी गोमती, गांगी, बेसो, भैंसहीं, कर्मनाशा, मगई, टोंस आदि में पानी कम होता जा रहा है। तेजी से सूख रहे पानी के कारण मई आते-आते कई नदियों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। ऐसे में पशु-पक्षी पानी के लिए भटकने को मजबूर होंगे।
पीजी कॉलेज के भूगोलविद राघवेंद्र पांडेय और मुहम्मदाबाद इंटर कॉलेज के भूगोल शिक्षक दयाशंकर राय ने बताया की भूजल के तेजी से नीचे भागने के पीछे जल दोहन जिम्मेदार है। मकान की धुलाई, वाहनों की धुलाई, फर्श की धुलाई, सार्वजनिक स्थलों की सफाई, धुलाई से लेकर पेयजल की बर्बादी है। लोग इसके प्रति जब तक सजग और सतर्क नहीं होंगे और जलदोहन नहीं रुकेगा, तब तक जल स्तर नीचे खिसकता रहेगा। कहा कि मनुष्य बिना जल के तीन दिन भी जिंदा नहीं रह सकता। वर्तमान में जल संकट बड़ी समस्या बनती जा रही है। जनपद में भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आर ओ प्लांटों से भी जलदोहन तेजी से हो रहा है। उधर नदियों का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। गर्मी की कौन कहे जाड़े में भी नदी का पानी अब लोग सेवन नहीं कर रहे हैं।
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