दुबिहा। क्षेत्र के असावर गांव स्थित बुढ़वा शिव मंदिर पर आयोजित सात दिवसीय रूद्रमहायज्ञ का समापन हवन-पूजन के बीच संपन्न हो गया। शाम को खेली गई फूलों की होली में लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। पूरे दिन श्रद्धालुओं द्वारा मंडप परिक्रमा का क्रम जारी रहा। इस मौके पर प्रवचन करते हुए अयोध्या से पधारे संत शिवराम दास फलहारी बाबा ने कहा कि राम को सीता से मिलने के लिए पुष्पवाटिका और हनुमान को सीता से मिलने के लिए अशोक वाटिका में जाना पड़ा। संत-सज्जनों की महफिल ही वाटिका है, जहां भक्ति रूपी सीता सदैव निवास करती हैं।
उन्होंने कहा कि जीवत्मा और परमात्मा के बीच सखी रूपी (देवर्षि नारद जी) महात्मा की मध्यस्थता से पुष्प वाटिका में राम-सीता का मिलन हुआ।ू विवाह बंधन और समझौता नहीं, बल्कि जीवन का सर्वोत्तम संस्कार है। जीवात्मा रूपी कन्या का पाणिग्रहण परमात्मा रूपी वर के हाथ होना ही जीवन की पूर्ण सफलता है। कुल परम्परा रूप और गुण के अनुरूप विवाह से दांपत्य के जीवन में शक्ति का संचार होता है। विवाहोपरांत धर्माचरण करते हुए उत्तम संतान की प्रप्ति ही दांपत्य की सफलता है। आज का विवाह प्राय: भोग बंधन और समझौता बनकर रह गया है, जिसका परिणाम तलाक, हत्या और आत्म हत्या के रूप में दिखाई दे रहा है। कहा कि पिता का ह्रदय बहुत ही कठोर होता है। पुत्र की मृत्यु पर भी जल्दी रोता नही है, लेकिन कलेजे के टुकड़े लाडली बिटिया को जब डोली पर बिठाता है तो आंखों से बरबस आंसू झरने लगता है। पुत्र यदि पिता की संपत्ति पर राज करता है तो पुत्री पिता के ह्रदय पर राज करती है। पुत्र केवल एक कुल का उद्धार करता है तो पुत्री दो कुल का उद्धार करती हैं। समापन मौके पर पूरे दिन हवन-पूजन के बीच श्रद्धालु मंडल परिक्रमा करते रहे। शाम को खेली गई फूलों की होली में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग निकला। सभी होगी के रंग में पूरी तरह से रंग गए। शिवराम दास फलहारी बाबा ने बताया कि यज्ञ स्थल पर रविवार को विशाल भंडारा का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर गोविंद राय, कृष्णानंद राय, औकारनाथ राय, अरविंद राय, अजय राय, लालबचन यादव, विरेंद्र कुशवाहा, कृष्णानंद उपाध्याय, अवधेश राय, विजय राजभर, ललक राजभर, मंगरु राम, गुलाब राम अवधेश राय, विश्वानंद तिवारी, मनोज तिवारी सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे।