गाजीपुर। चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वच्छ भारत मिशन के फेज-2 के तहत 530 ग्राम पंचायतों के 1273 राजस्व गांव जिले में मॉडल के रूप में विकसित होंगे। इसके लिए 25 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। अगले वर्ष मार्च तक चयनित ग्राम पंचायतें संवरी नजर आएंगी। कूड़ा प्रबंधन से लेकर बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त किया जाएगा।
जिले में कुल 1238 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 530 ग्राम पंचायताें को सुव्यवस्थित करने के लिए शासन स्तर पर पहल की गई है। इनको जनपदस्तर पर मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत कूड़ा प्रबंधन व आरआरसी (रिसोर्स रिकवरी सेंटर) की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही ओडीएफ की मुहिम को परवान चढ़ाया जाएगा। चयनित ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को कूड़ा इधर-उधर न फेंकना पड़े, इसके लिए डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था की जाएगी। प्रतिदिन सुबह ग्रामीणों के घर पर ई-रिक्शा जाएगा। इसके जरिए कूड़ा का उठान किया जाएगा। इसके बाद संग्रहित कूड़ा को आरआरसी में निष्प्रयोजित किया जाएगा। गीले व सूखे कूड़े को अलग-अलग तरीके से निस्तारित किया जाएगा। जलनिकासी के लिए नालियों के निर्माण के साथ ही सोख्ता बनवाया जाएगा। जिन ग्राम पंचायतों में नालियों का गंदा पानी पोखरे, जलाशयों व नदियों में जाता है, उसके लिए नालियों के अंतिम मुहाने पर फिल्टर चेंबर की व्यवस्था की जाएगी। डीपीआरओ अंशुल मौर्या ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत 530 ग्राम पंचायतों के 1273 राजस्व गांवों को मॉडल बनाने के लिए 25 करोड़ रुपये की धनराशि आई है।
ये होंगे कार्य -चयनित ग्राम पंचायतों को सुंदर बनाया जाएगा। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। गली-चौराहों पर प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। तालाबों के सुंदरीकरण का कार्य कराया जाएगा। सड़कों की मरम्मत के साथ ही सीसी रोड का निर्माण, जलभराव की समस्या का समाधान किया जाएगा। संबंधित ग्राम पंचायतों में यत्र-तत्र कूड़े का ढेर नजर नहीं आएगा।
कूड़े से तैयार होगा जैविक खाद व बायोगैस -ग्राम पंचायतों में रिसोर्स रिकवरी सेंटर की व्यवस्था होगी। इसमें ठोस व तरल कचरे को अलग करके निस्तारित किया जाएगा। निस्तारित कूड़े के जरिए बायोगैस व जैविक खाद तैयार किया जाएगा। जैविक खाद से खेतों में मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी।