सुहवल। हमीद सेतु के ज्वाइंटर 14 में पड़ी दरार का शुक्रवार को दिल्ली से आई अधिकारियों तथा इंजीनियरों की टीम ने निरीक्षण किया। इस बीच दरार की नाप जोख की गई। अभी यह रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। मरम्मत का काम कब शुरू होगा इस बावत कोई जानकारी नहीं दी गई है। इधर पांच दिन बीतने के बाद भी पुल पर गमना-गमन को लेकर समस्या और बढ़ती ही जा रही है। स्कूली छात्र-छात्राएं हो अथवा आमजन सभी को पैदल पुल पार करना भारी लग रहा है।
शुक्रवार को दोपहर में एनएचएआई दिल्ली जे.के. गोयल के नेतृत्व में अधिकारी तथा तकनीकी इंजीनियरों की टीम हमीद सेतु पर पहुंची। टीम ने दरार तथा स्थान का बारीकी से निरीक्षण किया। करीब आधे घंटे विचार विमर्श करने के बाद टीम वापस चली गई। टीम के सदस्यों ने बताया कि सरकार से संस्तुति मिलने के बाद मरम्मत का काम शुरू होगा। बिहार को जोड़ने वाली यह पुल गमनागमन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। क्षेत्र के करीब सौ से अधिक गांवों के लोग इस पुल से रोजाना आवागमन करते हैं। लोगों का कहना है कि पुल की दरार भी धीरे धीरे बढ़ती जा रही है। राहगीरों के पैदल गुजरते समय पिलर के स्लैब से आवाज भी आ रही है। अगर दरार बढ़ती जाएगी तो यह सेतु लंबे समय के लिए बंद करना पड़ सकता है। पुल पर वाहनों के रोक लग जाने का सीधा असर इनके दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। यात्री भी भारी सामानों को पीठ पर लाद कर सपरिवार चल रहे हैं। स्कूली वाहन भी पुल के पास आ कर रुक जा रहे हैं। इसके बाद स्कूली बच्चे बस्ता लेकर पैदल पुल पार कर रहे हैं। सेतु पर दूर-दूर तक पर पद यात्री, दो पहिया वाहन, रिक्शा, ठेला आदि नजर आ रहे हैं । सबसे अधिक परेशानी मरीज, गर्भवती महिलाओं आदि को आपात काल में जिला अस्पताल तक ले जाने में होती है। इधर लोग विकल्प के तौर पर गंगा पार करने के लिए नाव का सहारा तो ले रहे हैं लेकिन इस ठंड में नाव से गंगा पार करने में रूह कांप जा रही है। शाम को जल्दी ही नाव का संचालन भी बंद हो जा रहा है।