गाजीपुर। बेसो नदी के तट पर अंग्रेजों के समय बना नील का गोदाम मेहरल्लीपुर उर्फ भवरी गांव के बाहर स्थित है। मंगलवार को उसकी दीवार एकाएक गिर गई और उसमें चार युवकों के दबने से मौत हो गई। इसकी खबर लोगों के कानों तक जैसे ही पहुंची लोगों के पैर घटना स्थल की तरफ बढ़ गए। कुछ ही देर में हजारों लोग मौके पर पहुंच गए। आनन-फानन में मलवे को हटाया गया। उसमें दबे रमेश बिंद, धर्मेंद्र, उमेश और अच्छेलाल के शव को किसी तरह बाहर निकाला गया। शव देखते ही नदी किनारे की शांत वातावरण में मृतकों के परिजनों की चीख-पुकार गूंजने लगी।
रोज की तरह मंगलवार को 11 बजे के पहले तक मेरहल्लीपुर उर्फ भवरी गांव बिल्कुल शांत था। कोई घर के छत पर धूप सेक रहा था, तो कोई घर के अंदर बैठकर खाना खा रहा था। कुछ लोग खतों में काम कर रहे थे। इसी बीच जैसे ही इस बात को लेकर शोर होने लगा कि बेसो नदी किनारे स्थित अंग्रेजी के जमाने की नील गोदाम की दीवार गिर पड़ी है और उसमें गांव के चार लड़के दब गए हैं, लोगों में हड़कंप मच गया। उन लोगों की बेचैनी अधिक बढ़ गई, जिन परिवार के लड़के घर पर नहीं थे। ऐसे लोग बिना जूता-चप्पल पहने इस आशंका से घटना स्थल की तरफ दौड़ पड़े कि कहीं उनके घर का लड़का तो दीवार में नहीं दबा है। लोगों की इस भीड़ में रमेश बिंद (22), धर्मेंद्र बिंद (21), अच्छेलाल बिंद (20) और उमेश बिंद (20) के भी परिजन थे। जैसे ही इनके परिजन मौके पर पहुंचे और उनका शव देखा, वे बदहवास हो गए। कुछ ही देर में मौके पर सैकड़ों महिला-पुरुष पहुंच गए। खुले आसमान के नीचे चारों युवकों के शव पड़े थे। हर शव के पास बैठकर परिवार की महिला-पुरुष सहित बच्चे बिलखते रहे थे। यह मंजर देख वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। इस दौरान सांत्वना देने वालों की आंखें भी छलछला जा रही थीं। इस दर्दनाक दुर्घटना से मेहरल्लीपुर उर्फ भवरी गांव दुखों के समंदर में डूब गया। गांव में सियापा पसर गया।