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ब्लड की कमी से जूझ रहा जिले का ब्लड बैंक

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गाजीपुर। आप किसी अपने या जान पहचान के मरीज के लिए सरकारी ब्लड बैंक से निगेटिव ब्लड ग्रुप का खून लेने की सोच रहे हैं, तो फिलहाल आपकी यह जरूरत यहां पूरी नहीं होने वाली है। दरअसल पुराने जिला अस्पताल में बने रक्तकोष में निगेटिव ग्रुप का खून उपलब्ध नहीं है। अक्सर ब्लड ग्रुप को लेकर यहां किचकिच होती रहती है। केवल चंद लोगों की मांगें किसी तरह यहां पूरी हो पाती हैं। वर्तमान में तीन सौ यूनिट की क्षमता वाले ब्लड बैंक में महज दस यूनिट ब्लड उपलब्ध है। इसमें ओ पाजिटिव दो और ए पाजिटिव आठ यूनिट है, जबकि यहां प्रतिदिन पांच से आठ यूनिट ब्लड की यहां डिमांड रहती है। ब्लड बैंक कर्मियों की माने तो कभी-कभार यहां ब्लड बैंक में एक यूनिट भी ब्लड नहीं होता।
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अधिकारियों की मानें तो यहां ए, ओ, बी तथा एबी निगेटिव ग्रुप का ब्लड लंबे समय से नहीं आ रहा है। वर्तमान में अगर किसी मरीज को इनमें से किसी भी निगेटिव ग्रुप के ब्लड की जरूरत होगी तो उसे यह लाभ यहां शायद ही मिल पाए। लोग लाचारी में वाराणसी अथवा किसी प्राइवेट ब्लड बैंक में जाते हैं, मरीज इस ब्लड बैंक में एक-एक बूंद खून के लिए मारामारी करते हैं। मरीजों और परिजनों को ब्लड उपलब्ध न होने पर उन्हें प्राइवेट ब्लड बैंक जाना पड़ता है। कुल स्टॉक का तीन फीसदी ब्लड ही वर्तमान में उपलब्ध है। सर्वाधिक मरीज पाजिटिव ग्रुप के ब्लॉक के लिए आते हैं, लेकिन उसका भी टोटा बना रहता है। आलम यह है कि यहां निगेटिव ब्लड ग्रुप की कौन कहे, पाजिटिव भी शायद ही तत्काल मिल पाता है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन पांच से आठ यूनिट ब्लड की डिमांड होती है। बहुत सारे जरूरतमंदों को ब्लड के लिए अगले दिन तक का इंतजार करना पड़ता है। ब्लड बैंक की काउंसलर प्रज्ञा तिवारी एवं बीबीडी साकेत सिंह ने बताया कि यहां ब्लड लेने वाले ज्यादा, देने वाले कम हैं। यहां स्टॉक पूरा न होने की सबसे बड़ी वजह डोनर की कमी का होना है। यहां खून देने वालों से ज्यादा लेने वाले आते हैं। ब्लड बैंक को भी तो खून की जरूरत होती है, लेकिन आधे से ज्यादा लोग सिफारिश लेकर आते हैं। ऐसे में उन्हें बिना डोनर के ही ब्लड दिया जाता है।
जल्द नहीं मिलता निगेटिव ग्रुप का ब्लड : डा. केके भास्कर
गाजीपुर। ब्लड बैंक प्रभारी डा. केके भास्कर ने बताया कि ब्लड बैंक में रक्तदाताओं की कमी के कारण स्टाक काफी कम हो गया है। इस कारण विभिन्न ग्रुपों के पीड़ित मरीजों को ब्लड मिलना मुश्किल है। ब्लड बैंक की कुल क्षमता 300 यूनिट की है। वर्तमान में केवल दस यूनिट ही ब्लड उपलब्ध है। प्रतिदिन देखा जाए तो यहां पांच से आठ यूनिट ब्लड की खपत है। हर माह निगेटिव ग्रुप का ब्लड यहां नहीं उपलब्ध रहता है। आलम यह है कि ए निगेटिव,बी निगेटिव,ओ निगेटिव तथा एबी निगेटिव ब्लड का स्टॉक न होने की सबसे बड़ी वजह डोनर का न मिलना है। निगेटिव ग्रुप का ब्लड शायद ही कभी आता है। यही वजह है कि मरीजों को इन ग्रुप का ब्लड नहीं मिल पाता।
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11 कैंपों में 128 लोगों ने किया रक्तदान
गाजीपुर। जनपद में कुल चार माह के अंदर मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 11 रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया है। जिसमें कुल 128 यूनिट रक्त लोगों ने दान दिया है। देखा जाए तो ब्लड बैंक द्वारा निरंतर कैंप और प्रशासन के जागरूकता अभियान के का असर पहले की अपेक्षा कुछ बेहतर जरूर हुआ है, लेकिन अब भी रक्तदान करने से लोग हिचक रहे हैं। यही कारण है कि ब्लड बैंक की क्षमता के अनुरूप यहां कभी भी ब्लड नहीं मिला है।
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