जिले में माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षा की कापियों का मूल्यांकन कार्य तीसरे दिन सोमवार को भी ठप रहा। सभी सातों केंद्रों पर मूल्यांकन करने के लिए शिक्षक उपस्थित हुए लेकिन संगठन के विरोध के चलते उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। दूसरी ओर राजकीय शिक्षक संघ ने माध्यमिक और वित्तविहीन शिक्षक संघ की वाजिब मांग का नैतिक समर्थन किया है।
राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्याम नारायण सिंह यादव ने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों को पिछली सरकार में मानदेय दिया जा रहा था, जिसे वर्तमान सरकार ने बंद कर दिया है। यह अन्याय हुआ है। उन्हें यह मानदेय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से शिक्षकों की तरफ से कापियों का मूल्यांकन किया गया लेकिन उस पारिश्रमिक का भुगतान आज तक नहीं हुआ है। इससे शिक्षकों का शोषण हो रहा है। यह भुगतान शीघ्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार राजकीय शिक्षकों का अन्यत्र जिलों में समायोजन करना चाहती थी। उसके बाद उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया को पूर्ण करना चाहती है। राजकीय शिक्षक संघ ने पदोन्नति पहले करने और समायोजन बाद में करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से एलटी ग्रेड के शिक्षकों की पदोन्नति प्रवक्ता एवं राजपत्रित पदों पर न किए जाने से उनमें घोर निराशा व्याप्त है। उधर, जिले के सातों केंद्रों पर शिक्षक कापियों को जांचने के लिए पहुंचे तो जरूर लेकिन संगठन के विरोध के कारण कई केंद्रों पर शिक्षक हस्ताक्षर करके घर वापस लौट गए।