गाजीपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश ट्रांसफार्मर खुले में रखे गए हैं। सड़कों के किनारे लगाए गए ट्रांसफार्मर के काफी करीब से यात्री वाहनों के साथ ही दो पहिया और पैदल लोग गुजरते हैं। वहां आस-पास उगी हरियाली को चरने के लिए मवेशी भी ट्रांसफार्मर के काफी करीब चले जाते हैं, जिससे उन्हें करेंट लगने का खतरा बना रहता है। बावजूद विभाग ट्रांसफार्मर के अगल-बगल सुरक्षा घेरा लगाने को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा है।
गहमर संवाददाता के अनुसार ताड़ीघाट-बारा मार्ग पर राजकीय बालिका विद्यालय के मुख्य गेट के बगल में सड़क किनारे चार सौ केवी का ट्रांसफार्मर विभाग की तरफ लगाया गया है। सड़क निर्माण की वजह से आधा ट्रांसफार्मर सड़क से सटते हुए मिट्टी से ढक गया है। ट्रांसफार्मर में लगे तार जर्जर होकर पूरी तरह से नीचे लटके हुए हैं। इस खतरनाक ट्रांसफार्मर के काफी करीब से यात्री, निजी वाहन, ट्रकों के साथ ही स्कूली बसें बच्चों को लेकर आती-जाती हैं। बारिश होने पर मिट्टी दलदल में तब्दील हो जाती है। यहां पर दुर्घटना की अशंका बनी हुई है। इस संबंध में एसडीओ रत्नेश जयसवाल ने कहा कि बजट के अभाव में बैरिकेडिंग नहीं हो पा रहा है। प्रस्ताव भेजा जायेगा, बजट मिलने पर ट्रांसफार्मर को घेरवा दिया जाएगा। सेवराई संवाददाता के अनुसार बस स्टैंड और पानी टंकी के पास लगाए गए विद्युत ट्रांसफार्मर के अगल-बगल सुरक्षा घेरा नहीं नहीं लगाया गया है। इससे दुर्घटना की संभावना बनी हुई है। बस स्टैंड के पास लगाए गए ट्रांसफार्मर का प्लेटफार्म काफी नीचा बनाया गया है, जिससे ट्रांसफार्मर में लगा केबिल जमीन को छू रहा है। पानी टंकी के पास लगे ट्रांसफार्मर के आसपास घास-फूस जमा हुआ है। इसे चरने के लिए पशु ट्रांसफार्मर के काफी करीब चले जाते है, जिससे उन्हें करेंट लगने का खतरा बना रहता है। इन दोनों ट्रांसफार्मर में आए दिन शार्टसर्किट होने की घटना होती रहती है। चाय व्यवसायी ललिता शाह, करिया सिंह, मोहन, भोला, बबलू, सुनील, खुर्शिद, धर्मेन्द्र, सोनू, मुंशी यादव, कन्हैया, राकेश सिंह आदि ने कहा कि ट्रांसफार्मरों के अगल-बगल होले की जाली न लगाए जाने से खतरा हुआ है। इस संबंध में एसडीओ रत्नेश जायसवाल कहा कि प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। पास होते ट्रांसफार्मरों को लोहे की जाली से घेरवा दिया जाएगा।