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आचरण में लाने पर ही भागवत होगा फलदाई

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गाजीपुर। आशुतोष महाराज की शिष्या भागवताचार्या भारतीजी ने कहा कि भागवत जीवन का दर्पण है। यह जीवन की एक आदर्श संहिता है। इसके केवल श्रवण मात्र से कल्याण नहीं, बल्कि आचरण में लाने पर ही भागवत फलदाई होगा। यह बातें उन्होंने लंका मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए कहीं।
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भारतीजी ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग को प्रस्तुत किया। कहा कि द्वापर में कंस के अत्याचारों को समाप्त करने के लिए प्रभु धरती पर आए। उन्होंने गोकुल वासियों के जीवन को उत्सव बना दिया था। कथा के माध्यम से आज पंडाल में नंद महोत्सव की धूम देखते ही बन रही थी। बताया कि जब-जब इस धरा पर धर्म की हानि होती है, अधर्म, अत्याचार, अन्याय, अनैतिकता बढ़ती है, तब-तब धर्म की स्थापना के लिए करुणानिधान ईश्वर अवतार धारण करते हैं। प्रभु का अवतार धर्म की स्थापना के लिए, अधर्म का नाश करने के लिए होता है। साध्वी ने बताया कि धर्म कोई बाह्य वस्तु नहीं है। धर्म वह प्रक्रिया है जिससे परमात्मा को अपने अंतर्गत में ही जाना जाता है। कहा कि जब किसी तत्वदर्शी महापुरुष की कृपा से परमात्मा का प्राकट्य मनुष्य हृदय में होता है, तो परमात्मा के दिव्य रूप प्रकाश से सभी अज्ञान रूपी अंधकार दूर हो जाते हैं। इस मौके पर मुख्य अतिथि लल्लन सिंह, सरस्वती गुप्ता, विनोद राय, राजेश कुमार वर्मा, चंद्रमोहन शुक्ल, कन्हैया कुमार राय, राधेश्याम अग्रहरी आदि उप स्थित थे।
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