गाजीपुर/सुहवल। जिले में कोहरे का प्रभाव दो दिनों से कम है, लेकिन कड़ाके की ठंड का कहर जारी है। सर्द हवा और गलन के बीच लोग ठंड से कांप रहे हैं। आम जनजीवन के साथ पशु-पक्षी ठंड से बेहाल हैं। ठंड लगने से दो लोगों की मौत हो गई। उधर ठंड लगने से दर्जनों लोग बीमार हैं। गुरुवार की दोपहर कुछ देर के लिए धूप निकली जरूर थी। बावजूद गलन से लोग कांपते रहे। रेलवे स्टेशन, रोडवेज सहित अन्य बस स्टैंडों पर यात्री ठिठुरते नजर आए। राहत के लिए लोग अलाव का सहारा लेने में जुट गए हैं।
नगर सहित ग्रामीण इलाके में शीतलहर और बर्फीली हवा चलने से गलन बढ़ती जा रही है। बुधवार की देर रात रेवतीपुर थाना क्षेत्र के उत्तरौली गांव में ठंठ लगने से मुक्तेश्वर खरवार (58) की मौत हो गई। वह रोज की तरह अपना काम निपटा कर देर शाम भोजन कर सो गए। इसी बीच उनके शरीर में तेज कपकपी होने लगी और पेट दर्द करने लगा। परिजन निजी चिकित्सक के यहां प्राथमिक उपचार कराने के बाद जिला अस्पताल ले जा रहे थे। तभी अस्पताल ले जाते समय अधेड़ ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। गहमर थाने के पश्चिमी दलित बस्ती निवासी नंदकिशोर राम का बेटा वेदप्रकाश राम (18) गुरुवार की सुबह खेत घूमने गया था। इससे उसे कंपकंपी होने लगी। राहत के लिए परिवार के लोगों ने आग जलाया। कुछ राहत मिलने के बाद उसने खाना खाया। कुछ ही देर बाद उसके सीने में तेज दर्द उठने लगा। आनन-फानन में परिवार के लोग उसे चिकित्सक के पास ले गए। गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सक ने उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। अस्पताल आते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। शव घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। चिकित्सकों की माने तो युवक की मौत ठंड लगने से बताई जा रही है।
सर्द हवा के बीच पिछले कई दिनों ठंड निर्दयी बनी हुई है। पूरा जनपद उसकी आगोश में समा गया है। लगातार गिरते पारे ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। गुरुवार को भी न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम 22 डिग्री सेल्सियस रहा। गर्म कपड़े से शरीर को पूरी तरह से ढंकने के बाद भी ठंड तन और मन से जुदा नहीं हो रही है। खुले की कौन कहे, बंद कमरे के अंदर भी शरीर गलन से जम जा रहा है। इससे राहत के लिए लोग तरह-तरह का जतन कर रहे हैं। पिछले दो दिनों से कोहरे का प्रभाव काफी कम है, लेकिन ठंड में अधिकता आई है। गुरुवार को कड़ाके की सर्दी के बीच दिन में करीब बारह बजे जैसे ही धूप निकली, लोगों के मुंह से यह बात निकलने लगी कि चलो अब धूप के सहारे ठंड से कुछ राहत मिलेगी। जिसे जहां धूप मिली, वह वहीं खड़े होकर और बैठकर इसका आनंद लेने में जुट गया। बावजूद गलन तेज होने से धूप के बीच भी ठंड का असर कम नहीं हुुआ। लोगों के अंदर ठंड का एहसास होता रहा। जबतक लोगों को ठंड से राहत नहीं मिलेगी, तबतक वह धूप का आनंद लेते रहेंगे। छोटे-छोटे बच्चे भी घरों के बाहर धमाचौकड़ी करते नजर आए।
रेलवे स्टेशन, रोडवेज सहित प्राइवेट बस स्टैंडों पर यात्री ठिठुर रहे हैं, जहां अलाव जल रहे थे, वहीं राहत पाने वालों की भीड़ लगी रही। लोग तबतक अलाव के पास बैठे रहे, जब तक उन्हें ठंड से कुछ राहत नहीं मिल गई। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, वैसे-वैसे ठंड में वृद्धि भी होती गई। धूप निकलने से लोगों में इस बात की चर्चा होती रही कि आज कोहरा का अधिक प्रभाव रहेगा।