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सर्द हवा और गलन से ठिठुरे गांव व शहर

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गाजीपुर। ठंड अब किसी तरह का रहम दिखाने वाले नहीं है। दिन हो या रात गलन ने जनजीवन बेहाल हो गया है। लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। साल के आखिरी दिनों में मौसम का जो मिजाज है, उससे लगता है कि नए साल की आमद घने कोहरे व ठंड के बीच होगी। पिछले तीन दिनों से लगातार तापमान हो रही गिरावट इसका संकेत है। गुरुवार की शाम वातावरण में छाई धुंध देर रात घने कोहरे में तब्दील हो गई। जिससे दूसरे दिन दोपहर एक बजे तक सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। कुछ देर के लिए धूप चमकी भी, लेकिन फिर धूंध छाने लगी। कोहरे से सड़क और रेल परिवहन लड़खड़ा गया है। रोडवेज बसें वर्कशॉप से देर से निकलीं। ट्रेनों ने भी प्लेटफार्म तक पहुंचने में काफी देर कर दी।
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शुक्रवार का दिन ठिठुरन भरा रहा। कोहरे की चादर फैली रही। सूर्यदेव के न निकलने से दिन भी जल्दी ढल गया। ऑफिसों में अधिकारियों ने रूम हीटर ऑन कर लिए, वहीं शाम ढलते ही लोगों ने घरों में अंगीठी और लकड़ियां जलाकर ठंड का इंतजाम किया। सबसे ज्यादा परेशानी सड़क किनारे रहने वाले रिक्शा, ठेला और पटरी दुकानदारों को उठानी पड़ी। सिर छिपाने की पर्याप्त जगह न होने की वजह से यह लोग मौसम की मार झेली। शहर के बाजारों में भी कोहरा छाया रहा। ठंड के चलते दुकानदारी ठंडी रही। शुक्रवार सबसे ठंडा दिन बीता। दोपहर 12 बजे दस डिग्री तापमान रहा। शाम ढलते आठ से नौ डिग्री के बीच पहुंच गया।
ठंड इंसान और बेजुबानों के लिए भी मुसीबत बनी है। हर घंटे पर बदल रहा तापमान मौसम को कितना खतरनाक बना देगा, यह कोई नहीं जानता। गलन के कहर के बीच पक्षियों के लिए पेट भरना कठिन हो गया है। शुक्रवार को कुछ समय के लिए सूर्य ने दर्शन देकर ठंड से ठिठुर रहे लोगों को राहत पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके। पुछआ हवा के कहर ने लोगों को दुबकने के लिए मजबूर कर रखा है। पांच दिन से लगातार कोहरे और गलन का प्रभाव कायम है। रात में कोहरे का असर तो दिन में सर्द हवाओं का कहर लोग झेल रहे हैं। शुक्रवार को जिले का अधिकतम तापमान 19 डिग्री, न्यूनतम नौ डिग्री दर्ज किया गया। इस मौसम में कोई घर में दुबककर तो कोई चाय की दुकानों पर भट्ठियों से चिपका नजर आ रहा है। गंवई इलाकों में पुआल, सूखी लकड़ी आदि जलाकर ठंड से बचने का प्रयास किया जा रहा है।
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कोहरे में घिरे स्कूली बच्चे
सेवराई। शुक्रवार को घने कोहरे में बच्चे किसी तरह स्कूल के लिए रवाना हुए। स्कूली वैन-बस में तो कोहरे से बचाव हुआ, लेकिन रिक्शे से तथा पैदल जाने वाले बच्चों का बुरा हाल था। सुबह नौ बजे तक दस मीटर तक की दूरी पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। स्कूली वाहनों की रफ्तार भी काफी कम थी। रिक्शा चालक भी काफी एहतियात बरत रहे थे। स्कूलों के अवकाश के बाबत बच्चों को जिलाधिकारी के निर्देश का इंतजार है। डीएम के बाला जी ने 28 दिसंबर तक विद्यालय बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन ठंड में इजाफा के बाद भी अगला आदेश अभी तक जारी नहीं किया गया है।
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