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नदियों के नए रूख से तटीय क्षेत्र के रहवासी चिंतित

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सैदपुर (गाजीपुर)। लगातार कई दिनों से हो रही बारिश के चलते क्षेत्र में बहने वाली छोटी-बड़ी सभी नदियों के तेवर बदल गए हैं। नदियों के नए रुख से तटीय क्षेत्र के रहवासी चिंतित हैं। तहसील क्षेत्र में बहने वाली तीन बड़ी नदियों गंगा, गांगी, गोमती के किनारे तहसील क्षेत्र के 50 से ज्यादा गांव आबाद हैं। आबाद गांवों की खेती-बारी नदी क्षेत्र में ही ज्यादा है। नदी के किनारे आबाद गांव इस बरसात में जलजमाव से भले मुक्त है। लेकिन लगातार बरसात के चलते इन तीनों नदियों का पानी तेजी से किनारों की और बढ़ रहा है। ऐसे में गंगा नदी के निचले क्षेत्र में सब्जियों की फसल के खेत जहां प्रभावित हुए है, वहीं गोमती और गांगी के किनारे के तमाम गांवों में पशुओं की फसल भी प्रभावित हुई है।
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पिछले कई वर्षों से बारिश के सीजन के शुरूआती दिनों की कमजोर बरसात के चलते गंगा के किनारे तमाम किसान पेटे के भीतर तक तरबूज और खरबूज, ककड़ी के साथ सब्जियों की खेती भी करने लगे हैं। इसमें करैला, परवल, कोहड़ा, लौकी के अलावा हालिया दिनों में शिमला मिर्च की खेती करने लगे थे। तरबूज के खेत में डूब क्षेत्र की यह सब्जी की खेती किसानों की रक्षात्मक और बोनस दोनों मिजाज की मानी जाती है। गर्मी के फसल तरबूज, ककड़ी के दगा देने पर सब्जियों की यह खेती उन्हें आर्थिक घाटे से उबारने का काम करती है। वहीं दोनों फसल मजबूत हो जाने पर सब्जियों की यह फसल बोनस मानी जाती है। लंबे अरसे बाद लगातार पहली बरसात के कारण गंगा के बदले मिजाज से चंदपुर, चकेरी, दुबैठा आदि तटीय क्षेत्रों के किसानों की बड़ी क्षेत्र की यह खेती डूब गई है। इसका असर किसान के साथ सब्जी के भावों पर भी पड़ा है। पशुओं का चारा भी पानी में डूब गया है। इससे किसानों के माथे पर बल पड़ने लगा है।
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