गाजीपुर। जिले में हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर यातायात पुलिस सख्त नहीं दिख रही है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बाइक चालक बिना हेलमेट लगाए बेखौफ फर्राटा भर रहे है। शासन के निर्देश के बाद भी नो हेलमेट, नो पेट्रोल अभियान भी जिले में दम तोड़ चुका है। इधर बाइक चालकों में हेलमेट के प्रयोग को लेकर कोई जागरूकता नहीं दिखाई दे रही है। जबकि हेलमेट न पहनने से आए दिन हादसे हो रहे हैं।
शहर और ग्रामीण इलाके में ट्रिपल राइडिंग तो आम बात है। पुलिस की उदासीनता के कारण यातायात के नियमों का पालन करने से बाइक चालक कतरा रहे हैं। जिला और यातायात पुलिस की ओर से तीन सवारी और हेलमेट को लेकर फिलहाल कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है। जबकि शासन की ओर से नो हेलमेट, नो पेट्रोल के अभियान को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया था। शासन के निर्देश के बाद कुछ दिनों तक इसकी हनक दिखाई पड़ी। इसके बात सबकुछ पहले जैसा चलने लगा। हेलमेट की अनिवार्यता और ट्रिपल राइडिंग पर अंकुश लगाने के लिए सोमवार से मार्गो पर उतरने वाली यातायात और स्थानीय पुलिस दो दिन बाद भी कहीं नहीं दिखाई दे रही है। जबकि इस विशेष अभियान की शुरूआत करने के लिए सीओ सिटी ने चेकिंग अभियान के तहत सभी थानाध्यक्षों को निर्देश देने का दावा किया था। लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ अलग ही बयां कर रही है। हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर कोई विशेष अभियान जिले में अभी तक नहीं शुरू किया गया है।
हेलमेट की अनिवार्यता के लिए सामजिक संगठन भी आगे आएं : एसपी
गाजीपुर। पुलिस अधीक्षक सोमेन वर्मा ने कहा कि पुलिस तीन सवारी और हेलमेट की अनिवार्यता के लिए समय-समय पर अभियान चलाती रही है। वर्तमान में भी एसपी सिटी के नेतृत्व में टीम बनाकर हेलमेट की चेकिंग और अनिवार्यता को लेकर कार्रवाई दो दिन के भीतर शुरू की जाएगी। इस कार्य में जरूरत पड़ी तो सामाजिक संगठनों को भी जोड़ा जाएगा। हेलमेट न पहनने से आए दिन हादसे के दौरान जानें जाती हैं। इसके लिए लोगों को जागरूक होना जरूरी है। सभी मिलकर इस दिशा में काम करें तो, निश्चित ही बेहतर सफलता मिलेगी। इस कार्य में सामाजिक संगठनों को भी आगे आने की जरूरत है।
बाइक का एक हिस्सा है हेलमेट
गाजीपुर। जान है, तो जहान है। लेकिन जीवन की सुरक्षा को लेकर जनपदवासी संजीदा नहीं हैं। सभी जानते हैं कि बिना हेलमेट बाइक चलाना जीवन को खतरे में डालना है। बावजूद इसकी परवाह हमे नहीं है। हेलमेट जीवन को सुरक्षित रखने के साथ सर्दी, धूप और बरसात से भी बचाव करता है। सड़क दुर्घटना के वक्त लोग इस दिशा में कुछ समय के लिए सोचते हैं, लेकिन फिर भूल जाते हैं। नगर में अस्सी फीसदी बाइक चालक बिना हेलमेट लगाए फर्राटा भर रहे हैं। इन्हें रोकने और टोकने वाला कोई नहीं है। बुद्धिजीवियों की माने तो हेलमेट बाइक का एक हिस्सा है। उसे हमेशा साथ रखना अनिवार्य है। इसकी जिम्मेदारी अकेले पुलिस की नहीं है, बल्कि हम सभी की है। विभिन्न सामाजिक संगठन, अभिभावक और युवा संगठन भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। जिले में अक्सर हेलमेट पहनने का कार्य वाहन चेकिंग के दौरान ही किया जाता है। जबकि अन्य दिनों में बाइक चालक महिला हो अथवा पुरूष इसे बोझ समझकर पहनने से परहेज करते हैं। हेलमेट का प्रयोग सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। लाख प्रयास के बाद भी आज तक इसकी अनिवार्यता पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पा रही है। इसके लिए अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने के साथ ही स्कूलों में यूथ को संकल्प दिलाना होगा।
सड़क दुर्घंटनाओं में बिना हेलमेट पहने अधिकांश चालकों की मौत हो जाती है। हेलमेट जीवन रक्षा में अपनी अहम भूमिका निभाता है। बाइक सवार को हेलमेट का प्रयोग निश्चित तौर से करना चाहिए। जिससे वह वाहन चलाते समय सुरक्षित रहे। - देवनाथ उपाध्याय, पूर्व सैनिक, गहमर।
हेलमेट पहनने के लिए जागरूकता जरूरी है। बाइक चालक हेलमेट पहनने को बोझ समझते है। हेलमेट को बोझ नहीं समझना चाहिए। हेलमेट सड़क दुर्घंटना के साथ धुल कण से भी चालक को सुरक्षित रखता है।- योगेंद्र नाथ सिंह यादव, पूर्व सैनिक, सुहवल।
सड़क हादसे के दौरान अक्सर देखा जाता है कि हेलमेट न पहनने वाले चालक की मौत हो जाती है। बाइक चलाने से पहले हेलमेेट पहनना अनिवार्य है। हेलमेट पहनने के बाद ही बाइक चालक सड़क पर वाहन चलाए।- बागीश उपाध्याय, पूर्व सैनिक, गहमर
बाइक को यातायात नियमों के अनुसार ही चलाना चाहिए। बाइक पर ट्रिपल राइडिंग हर हाल में न करें। अक्सर युवा वर्ग बाइक पर ट्रिपल सवारी और बिना हेलमेट के बाइक चलाते है। ऐसे लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है। नरसिंह उपाध्याय, पूर्व सैनिक, गहमर।