देवकली(गाजीपुर)। ब्रह्म स्थल देवकली के परिसर में मानस सम्मेलन आयोजित है। पहले दिन मंगलवार को प्रवचन करते हुए अयोध्या से आए हुए संत रमाशंकर दास त्यागी जी ने कहा कि चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद जीव को मनुष्य का शरीर मिलता है लेकिन माया रूपी संसार में आते ही परमात्मा को भूल जाता है। इस नश्वर संसार को अपना असली घर मान लेता है। यही सभी दुखों का मूल कारण होता है।
त्यागी जी महाराज ने कहा कि जीव जब मां के गर्भ में रहता है तो कई प्रकार का कष्ट सहन करता है उस समय विनती करता है। हे प्रभु नर्क से बाहर करो मैं आप का भजन करके इस आवागमन से मुक्त होने का प्रयास करुंगा। इस अनमोल शरीर की कीमत न पहचानने के कारण मानव चौरासी लाख योनियों में भटकता फिरता है। रामसुधार पांडेय ने कहा कि रामचरित मानस एक आदर्श ग्रंथ है। इसके सभी पात्र आदर्श से परिपूर्ण हैं। पिता-पुत्र, पति-पत्नी, सास-बहू, मित्र से मित्र, भाई से भाई, का संबंध कैसा होना चाहिए संपूर्ण शिक्षा मिलती है, जो मानव जीवन के लिए अनुकरणीय है। रामचरित मानस के उपदेशों को अपना कर पूरे विश्व को एक सूत्र में बांधा जा सकता है। प्रवचन के कार्यक्रम में रामचंद्राचार्य, रविंद्रनाथ पांडेय, रमाशंकर पांडेय, नीरज शास्त्री आदि विद्वानों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभुनाथ पांडेय एवं संचालन अरविंदलाल श्रीवास्तव ने किया। प्रवचन का कार्यक्रम 18 दिसंबर से 22 दिसंबर तक चलेगा।