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कटान पीड़ितों ने की मोक्षदायिनी की आराधना

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करंडा। क्षेत्र के कटान प्रभावित गांवों बड़हरिया, सोकनी, रफीपुर और बयेपुर के दर्जनों किसान ने सोमवार को एकादशी के दिन नावों से रेत पर पहुंचे। वहां पर पूजन-अर्चन करते हुए मां गंगा को दूध का अर्घ्य देकर गांव को कटाने से बचाने की प्रार्थना की। इसके साथ ही कटान को रोकना का ठोस उपाय करने के लिए जनप्रति निधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सद्बुद्धि की कामना की।
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क्षेत्र के बड़हरिया, सोकनी, रफीपुर और बयेपुर के दर्जनों किसान सोमवार को नाव के गंगा के रेत पर पहुंचा। गांव के कटान से बचाने के लिए विधिवत हवन-पूजन के बीच मां को नारियल आदि प्रसाद सामग्री अर्पित किया। इसके साथ ही दो कुंतल दूध का पतित पावनी को अर्घ्य देकर उनसे गांव को कटाने से बचाने की प्रार्थना की। उनसे इस बात की कामना की कि मां जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को इस बात की की सदबुद्धि दीजिए कि वह कटान रोकने का ठोस उपाय कर सके ताकि हम बेघर होने से बच जाए। पूजन-अर्चन करने वालों में हरिदयाल, प्रभुदयाल, बसगीत, भानू, गुड्डू, योगेंद्र, अंगद, विरेंद्र, गोविंद, मुन्नीलाल, पारस, राजबली, त्रिभुवन, भुल्लन, नागेंद्र, रामजी, राहुल, मनोज, गोविंद, हरिहर सहित दर्जनों लोग शामिल रहे। मालूम हो कि क्षेत्र के कटान प्रभावित गांवों बड़हरिया, सोकनी, रफीपुर और बयेपुर गांव में वर्षों से कटान का सिलसिला बना हुआ है। कुछ वर्षों में लगभग 500 एकड़ भूमि गंगा में विलीन हो चुकी है और कई दर्जन लोग भूमिहीन हो गए हैं। 2017 में कटान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने लगभग 80 लाख रुपए की लागत से बल्लियां आदि लगवाकर कटान रोकने का प्रयास किया था, लेकिन सारा प्रयास निरर्थक रहा। पुन: 2018 में भी बांस के कैरेट आदि से कटान रोकने का प्रयास किया गया, जो कुछ हद तक सफल रहा। कटान रोकने का मुकम्मल इंतजाम करने के लिए पी ड़ित कई बार स्वाभिमान संगठन के लोगों से जिलाधिकारी से मिल चुके है।
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