करंडा(गाजीपुर)। गंगा नदी में मंगलवार को फिर से धीमी रफ्तार में कटान का क्रम शुरू हो गया है। इस बीच बड़हरिया में आठ बिस्वा खेती योग्य भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई। एक बार फिर से कटान शुरू होने से पीड़ितों के माथे पर बल पड़ गया। खासकर बड़हरिया में तेजी से हो रहे कटान के कारण लोग ज्यादा चिंतित हैं। जिनके मकान कटान के मुहाने पर खड़े हैं, उनकी नींद हराम हो गई है। हालांकि सिंचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने के लिए बांस का कैरेट लगाकर उसमें बोरी में भरकर ईंट-पत्थर डालने का कार्य किया जा रहा है।
बीते 29 जुलाई को गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने पर विभिन्न किसानों की पांच बीघा भूमि कटान की भेंट चढ़ गई थी। इसके बाद कटान की रफ्तार काफी धीमा होने पर पीड़ितों ने काफी राहत महसूस की, लेकिन दो अगस्त को पुन: एक बार गंगा का पानी बढ़ने से कटान की रफ्तार में भी वृद्धि हो गई है। कुछ ही घंटे में बड़हरिया और रफीपुर के विभिन्न किसानों के आंखों के सामने ही करीब आठ बीघा भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई। इसके बाद कटान की रफ्तार थम गई थी, जिससे पीड़ित राहत महसूस कर रहे थे। मंगलवार को एक बार फिर से बड़हरिया में कटान का सिलसिला शुरू हो गया, लेकिन रफ्तार काफी धीमी रही। बावजूद इसके किसान सुदामा की लगभग आठ बिस्वा खेती योग्य भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई। इस कटान से बड़हरिया के उन पीड़ितों के माथे पर बल पड़ गया, जिनके मकान कटान की मुहाने पर खड़े हैं। उनको इस बात का भय सता रहा है कि कटान की रफ्तार बढ़ी तो उनके मकान भी गंगा की जद में आ जाएंगे। जिनके मकान कटान मुहाने पर खड़े है, उनमें गोविंद, कपिलदेव, हरिदयाल, कमला, दयाशंकर, तेजनरायन, देवनरायन, बसगित आदि शामिल हैं। हालांकि पिछले कई दिनों से युद्ध स्तर पर सिंचाई विभाग की तरफ कटान वाले स्थान पर बांस का कैरेट लगवाकर उसमें बोरी में ईंट-पत्थर भरवाकर डालने के साथ पत्तियों सहित पेड़ों की डालियों को लगाने का कार्य किया जा रहा है।