फर्जी सूचना देकर पुलिस को ‘मामू’ बनाने के दिन अब लदने वाले हैं। जिले में जल्द ही ऐसी व्यवस्था होने जा रही है, जब कोई भी व्यक्ति किसी वारदात की सूचना पुलिस को 100 नंबर पर देगा तो पुलिस उसकी लोकेशन तक पहुंच जाएगी।
फोन रिसीव होने के साथ ही कॉलर की आवाज भी खुद-ब-खुद रिकॉर्ड होनी शुरू हो जाएगी। खास बात यह है कि शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना को गाजियाबाद में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा। वर्ष 2013 तक इस व्यवस्था के शुरू होने की उम्मीद है।
वर्तमान में पुलिस कंट्रोल रूम का 100 डायल फोन लाइन पर काम कर रहा है। एसएसपी प्रशांत कुमार की माने तो जल्द ही कंट्रोल रूम की लाइन को इंटरनेट से जोड़ दिया जाएगा। अत्याधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम में कंप्यूटर भी लगेगा। कंट्रोल रूम में प्रत्येक कॉलर की कॉल रिसीव होने के साथ ही रिकॉर्ड होनी शुरू हो जाएगी।
इससे पुलिस को फर्जी कॉल से तो राहत मिलेगी ही, साथ ही साथ किसी प्रकार की वारदात होने के बाद पुलिस भी समय से घटनास्थल पर पहुंच जाएगी। आने वाली कॉल के बाद इंटरनेट की सहायता से कॉलर और घटना स्थल का सही प्वाइंट भी चिन्हित कर लिया जाएगा।
‘गाजियाबाद में कंट्रोल रूम की यह व्यवस्था दिल्ली पुलिस से भी एक कदम आगे होगी। दिल्ली में फिलहाल घटना स्थल का प्वाइंट तो चिन्हित कर लिया जाता है, मगर कॉलर की आटोमेटिक रिकॉर्डिंग का अभी वहां अभाव है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए प्रतिमाह करीब एक लाख रुपए का खर्च अकेले गाजियाबाद पर आएगा।’
- प्रशांत कुमार, एसएसपी गाजियाबाद